चीनी मिलें स्थापित करने और बंद मिलों को फिर से खोलने के लिए कदम उठा रही सरकार: मंत्री
चीनी मिलें स्थापित करने और बंद मिलों को फिर से खोलने के लिए कदम उठा रही सरकार: मंत्री
पटना, 10 फरवरी (भाषा) बिहार सरकार राज्य में नई चीनी मिलें स्थापित करने और बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरू करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार पासवान ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि गन्ना उद्योग विभाग ने राज्य के 25 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर नई चीनी मिलों के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान और अधिग्रहण करने का निर्देश दिया है।
इन जिलों में मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, समस्तीपुर, गया, शिवहर, सिवान, रोहतास, मोतिहारी, पश्चिम चंपारण और पटना शामिल हैं। पासवान ने कहा कि रोजगार सृजन राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।
उन्होंने बताया, “ सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोजगार देना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कई बार कह चुके हैं कि बिहार से पलायन रोकने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है। नई चीनी मिलें इस दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी।”
मंत्री ने बताया कि राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वारिसलीगंज स्थित चीनी मिल जैसी इकाइयों को दोबारा शुरू करने पर चर्चा चल रही है।
पासवान ने कहा कि इसके अलावा दरभंगा और मधुबनी जिलों की रायम और सकरी चीनी मिलों से जुड़े प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में पेश किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जो चीनी मिलों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर सुधार के सुझाव देगी।
समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
मंत्री ने दावा किया कि सकरी, रायम और सासामूसा, इन तीन चीनी मिलों को सरकार एक वर्ष के भीतर चालू करने की योजना बना रही है।
उन्होंने किसानों के गन्ना खेती से धीरे-धीरे दूर होने की चिंता पर कहा कि विभाग नियमित रूप से सेमिनार आयोजित कर रहा है, किसान-केंद्रित योजनाएं लागू की जा रही हैं और वह स्वयं किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
पासवान ने गन्ना मूल्य निर्धारण के मुद्दे पर कहा कि बिहार की अधिकांश चीनी मिलें निजी लिमिटेड कंपनियों के अधीन हैं और कीमतें उनकी सहमति से तय होती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश के बराबर रखा जाए, जहां यह लगभग 400 रुपये प्रति क्विंटल है।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य के 84 प्रतिशत किसानों को 15 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान मिल रहा है।
बिहार सरकार ने 2025-26 पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) तय किया है, इसके तहत सुपर ग्रेड गन्ने के लिए 380 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य ग्रेड के लिए 360 रुपये और निम्न ग्रेड के लिए 330 रुपये प्रति क्विंटल रेट निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गन्ना खेती को प्रभावित कर रही जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
भाषा कैलाश जितेंद्र
जितेंद्र

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