अगर ऊंची जातियों को न्याय की जरूरत हो, तो उनकी मदद करना मेरी जिम्मेदारी है: चिराग पासवान

अगर ऊंची जातियों को न्याय की जरूरत हो, तो उनकी मदद करना मेरी जिम्मेदारी है: चिराग पासवान

अगर ऊंची जातियों को न्याय की जरूरत हो, तो उनकी मदद करना मेरी जिम्मेदारी है: चिराग पासवान
Modified Date: August 31, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: August 31, 2026 6:59 pm IST

पटना, 31 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि राजग सरकार ‘‘सवर्ण जातियों की आशंकाओं’’ को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है और वह सुनिश्चित करेगी कि वंचित वर्गों के हितों की रक्षा से ‘‘अन्य सामाजिक समूहों का शोषण’’ न हो।

पासवान ने यह भी कहा कि अगर ऊंची जातियों को लगता है कि उन्हें न्याय की जरूरत है, तो उनकी मदद करना वह अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।

लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख ने ऊंची जातियों के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने समुदायों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाए हैं। उन्होंने वादा किया कि वह अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने वाले ‘‘एक सेतु के रूप में काम करेंगे’’।

पासवान अनूसुचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सबसे पिछड़े वर्गों के लिए उप-कोटा लागू करने को लेकर अपने द्वारा जताए गए विरोध से संबंधित सवाल का जवाब दे रहे थे। उनके इस विरोध की वजह से मंत्रिमंडल में उनके सहयोगी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ उनकी तीखी बहस छिड़ गई है।

हाजीपुर के सांसद ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक मांझी के साथ अपने मतभेद पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा, ‘‘आरक्षण के बारे में मेरी साफ राय है कि अगर किसी एक सामाजिक वर्ग की अपनी चिंताएं हैं, तो दूसरों की आशंकाओं का ध्यान रखना भी हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।’’

पासवान ने कहा, ‘‘एक ओर हमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा करनी है, लेकिन दूसरी ओर हमें ऊंची जातियों की आशंकाओं को भी दूर करना चाहिए। किसी एक जाति के हितों की रक्षा करने का नतीजा दूसरी जाति के शोषण के रूप में नहीं निकलना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने हमेशा सभी वर्गों और जातियों को साथ लेकर चलने की वकालत की है। मैंने हमेशा जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों से जुड़ने की कोशिश की है। इसलिए, यदि सवर्णों को लगता है कि उन्हें न्याय की जरूरत है, तो उनकी मदद करना मैं अपनी जिम्मेदारी समझूंगा।’’

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव


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