हत्या मामले में 16 साल जेल काटने के बाद एक व्यक्ति बरी, पुलिस की मिलीभगत पर उठाए गये सवाल

हत्या मामले में 16 साल जेल काटने के बाद एक व्यक्ति बरी, पुलिस की मिलीभगत पर उठाए गये सवाल

हत्या मामले में 16 साल जेल काटने के बाद एक व्यक्ति बरी, पुलिस की मिलीभगत पर उठाए गये सवाल
Modified Date: September 11, 2026 / 11:27 pm IST
Published Date: September 11, 2026 11:27 pm IST

पटना, 11 सितंबर (भाषा) पटना उच्च न्यायालय ने बिहार के समस्तीपुर के एक व्यक्ति को हत्या मामले में 16 वर्ष जेल में बिताने के बाद बरी कर दिया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और आरोपी के खिलाफ “कोई साक्ष्य” नहीं है।

पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत पर गंभीर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मामले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दो माह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया।

न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने 10 सितंबर को अपने फैसले में समस्तीपुर की निचली अदालत द्वारा रणजीत कुमार झा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया।

अभियोजन के अनुसार, 3,300 रुपये के विवाद को लेकर रणजीत कुमार झा ने पवन कुमार झा की गोली मारकर हत्या कर दी थी । पवन कुमार झा के भाई ने उसे घटनास्थल से भागते हुए देखने का दावा किया था।

उच्च न्यायालय ने हालांकि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास और असंगतियां पाईं। उच्च न्यायालय ने कहा कि ‘शत्रुतापूर्ण गवाहों’ की गवाही अविश्वसनीय है और अभियोजन स्वतंत्र गवाहों को पेश करने में भी विफल रहा।

खंडपीठ ने कहा कि रुपये के विवाद से जुड़े कथित विषय की जांच ही नहीं की गई, इसलिए हत्या के पीछे बताए गए उद्देश्य को भी साबित नहीं किया जा सका।

उच्च न्यायालय ने हत्या में प्रयुक्त बताए गए पिस्तौल की जांच पर सवाल उठाए। उसने कहा कि बरामद पिस्तौल को फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) नहीं भेजा गया, जिससे यह साबित हो सके कि उसी हथियार से पवन कुमार झा को गोली मारी गई थी।

उच्च न्यायालय ने कहा, “यह ऐसा मामला है जिसमें अपीलकर्ता के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है।”

न्यायालय ने टिप्पणी की कि थाना प्रभारी से लेकर जांच अधिकारी तक पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से शत्रुतापूर्ण गवाहों के साथ मिलीभगत कर अपीलकर्ता के खिलाफ झूठा मामला तैयार किया।

अदालत ने यह भी कहा कि लंबे कारावास के कारण अपीलकर्ता मानसिक बीमारी और अवसाद का शिकार हो गया तथा उसकी समयपूर्व रिहाई पर विचार करने में भी अनावश्यक विलंब हुआ।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को रणजीत कुमार झा के पुनर्वास और समुचित चिकित्सा उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संबंधित अधिकारियों को उसके लिए पुनर्वास योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

भाषा सं कैलाश

राजकुमार

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