‘बंटवारा 1947’ एक मां के जरिये विभाजन की त्रासदी का मानवीय पहलू दिखाती है: सनी देओल
'बंटवारा 1947' एक मां के जरिये विभाजन की त्रासदी का मानवीय पहलू दिखाती है: सनी देओल
पटना, दो अगस्त (भाषा) अभिनेता सनी देओल ने रविवार को कहा कि उनकी आगामी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ एक परिवार की कहानी के जरिए विभाजन की मानवीय पीड़ा और उसके प्रभाव को दिखाती है। उन्होंने कहा कि फिल्म में मां का किरदार भावनात्मक केंद्र के रूप में उभरकर सामने आता है।
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अभिनेता ने बताया कि यह फिल्म मशहूर लेखक असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई’ पर आधारित है।
फिल्म को मानवीय रिश्तों पर केंद्रित बताते हुए देओल ने कहा कि यह इस बात पर जोर देती है कि “मां सभी धर्मों और आस्थाओं से ऊपर होती है”।
उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है। यही इस फिल्म का मूल है।” उन्होंने कहा कि यह फिल्म साधारण परिवारों पर बंटवारे के असर को दिखाती है।
फिल्म के मुख्य संदेश के बारे में पूछे जाने पर देओल ने कहा, “यह फिल्म एक मां जैसी शख्सियत के इर्द-गिर्द घूमती है। इसका मुख्य संदेश यह है कि मां अपने आप में एक धर्म है और उससे बढ़कर कुछ भी नहीं है।”
देओल ने कहा कि यह फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को आगे बढ़ाती है, जिनके साथ उन्होंने ‘घायल’ (1990), ‘दामिनी’ (1993) और ‘घातक’ (1996) जैसी हिट फिल्में दी हैं।
भाषा
शुभम प्रशांत
प्रशांत

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