पटना उच्च न्यायालय ने सहरसा मध्याह्न भोजन मामले में जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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पटना उच्च न्यायालय ने सहरसा मध्याह्न भोजन मामले में जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 06:33 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 06:33 PM IST

पटना, 21 मई (भाषा) बिहार के सहरसा जिले के एक सरकारी स्कूल में मध्याह्न भोजन खाने के बाद 189 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में पटना उच्च न्यायालय ने भोजन की थालियों में ‘‘छोटे सांप’’ मिलने की रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताई है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने नमूनों के संग्रह और जांच प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए।

सहरसा जिले के बलुआहा और चंद्रयान गांवों के स्कूलों में सात मई को पीएम पोषण योजना के तहत परोसे गए भोजन को खाने के बाद बच्चे बीमार पड़ गए थे।

अदालत ने 19 मई के आदेश में फॉरेंसिक निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बलुआहा गांव के एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय में भोजन की थालियों से ‘‘छोटे सांप’’ बरामद किए जाने का उल्लेख किया गया है।

अदालत ने सहरसा के पुलिस अधीक्षक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और पीएम पोषण योजना के अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर जब्ती, नमूना संग्रह और प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

खंडपीठ ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा कथित रूप से स्वतंत्र रूप से ‘दाल’ और ‘खिचड़ी’ के नमूने लेकर उन्हें अगमकुआं स्थित प्रयोगशाला में कूरियर के माध्यम से भेजे जाने पर भी सवाल उठाए।

अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारी के बयान और प्रयोगशाला रिपोर्ट में अंतर है, जिसमें नमूनों को ‘‘दाल’’ और ‘‘सब्जियां’’ बताया गया है।

उच्च न्यायालय ने नमूनों को क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, भागलपुर भेजने में देरी पर सवाल उठाते हुए सहरसा के पुलिस अधीक्षक को जांच की निगरानी करने और मामले में गठित एसआईटी का नेतृत्व करने का निर्देश दिया।

खंडपीठ ने पीएम पोषण निदेशालय से यह भी जांच करने को कहा कि क्या 144 स्कूलों में भोजन आपूर्ति करने वाले गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) को जांच पूरी होने तक काम जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

इस मामले में भोजन आपूर्ति करने वाले एनजीओ ‘भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति’ को भी पक्षकार बनाया गया है।

मामले की अगली सुनवाई दो जून को होगी।

भाषा

कैलाश रवि कांत