एक राष्ट्र एक चुनाव: जेपीसी अध्यक्ष ने कहा, मतदाता मुद्दों को अलग करने में सक्षम

Ads

एक राष्ट्र एक चुनाव: जेपीसी अध्यक्ष ने कहा, मतदाता मुद्दों को अलग करने में सक्षम

  •  
  • Publish Date - May 21, 2026 / 07:13 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 07:13 PM IST

गांधीनगर, 21 मई (भाषा) ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि मतदाता विधानसभा और लोकसभा चुनावों से संबंधित मुद्दों में अंतर करने के लिहाज से पर्याप्त रूप से समझदार हैं और जानते हैं कि एक साथ चुनाव होने पर किसे वोट देना है।

गुजरात में प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ प्रणाली पर परामर्श के दौरान उठाई गई चिंताओं को संबोधित करते हुए चौधरी ने जोर दिया कि भारतीय मतदाताओं, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं में, मतदान करते समय राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय मुद्दों में अंतर करने की राजनीतिक जागरूकता है।

मीडिया प्रतिनिधियों ने बृहस्पतिवार को गांधीनगर के जीआईएफटी सिटी में समिति के साथ बातचीत की और आशंका जताई कि एक साथ चुनाव होने से राज्य-विशिष्ट और स्थानीय शासन के मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों के आगे दब सकते हैं।

जेपीसी के तीन दिवसीय गुजरात दौरे के समापन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चौधरी ने कहा, ‘‘आज मतदाता और भी अधिक जागरूक हैं। वे जानते हैं कि एक साथ चुनाव होने पर किसे वोट देना है। उनकी आलोचनात्मक सोच और क्षमता को कम नहीं आंका जाना चाहिए। मतदाता लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनावों में सामने आए मुद्दे के आधार पर यह जानते हैं कि उन्हें किस पार्टी का समर्थन करना है।’’

दिल्ली का उदाहरण देते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में मतदाताओं ने सभी सात लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवारों को चुना, जबकि अलग से हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का समर्थन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे उदाहरण अन्य राज्यों में भी मौजूद हैं। राजस्थान में एक पार्टी राज्य सरकार बना सकती है, जबकि दूसरी पार्टी लोकसभा की अधिकांश सीटें जीत सकती है। इसलिए, मतदाताओं के भ्रमित होने की आशंकाएं निराधार हैं।’’

चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनावों पर हितधारकों के विचार जानने के लिए 19 मई को गुजरात का दौरा शुरू किया।

गांधीनगर के पास जीआईएफटी सिटी में परामर्श के अंतिम दिन, पैनल ने अधिवक्ताओं, गैर सरकारी संगठनों, औद्योगिक संघों, शिक्षाविदों और मीडिया जगत के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।

चर्चा के दौरान, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), एसोचैम और गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) जैसे उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

सीआईआई के एक प्रतिनिधि ने सुझाव दिया कि प्रवासी श्रमिकों को ई-वोटिंग की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए, क्योंकि श्रमिकों के अक्सर मतदान के लिए अपने पैतृक स्थानों पर लौटने के कारण चुनावों के दौरान उद्योगों को उत्पादन में नुकसान होता है।

इस मुद्दे पर चौधरी ने कहा कि देश भर में प्रवासी श्रमिक चुनावों के दौरान मतदान के लिए अपने कार्यस्थल छोड़कर घर जाते हैं, जिससे उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों में भारी व्यवधान उत्पन्न होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘चुनावों के दौरान श्रमिकों के इस विस्थापन से होने वाला नुकसान अथाह है और इसका आकलन भी नहीं किया जा सकता।’’

गुजरात विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता ने भी बार-बार होने वाले चुनावों के दौरान शैक्षणिक कार्यक्रमों में व्यवधान से संबंधित चिंताओं को उठाते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।

उन्होंने समिति को बताया कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं अक्सर प्रभावित होती हैं क्योंकि शिक्षण और प्रशासनिक कर्मचारियों को चुनाव कार्यों में लगाया जाता है।

चौधरी ने कहा कि जेपीसी की पिछली यात्राओं के दौरान पंजाब और हरियाणा में भी इसी तरह की चिंताएं उठाई गई थीं, जहां शिक्षण संस्थानों ने एक साथ चुनाव कराने का बिना शर्त समर्थन किया था। उनका तर्क था कि बार-बार चुनाव होने से शैक्षणिक कार्यक्रम बाधित होते हैं और छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

कांग्रेस ने बुधवार को जेपीसी के साथ अपनी बातचीत के दौरान इस पर आपत्ति जताई। गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि यदि संसदीय, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो स्थानीय मुद्दे दब जाएंगे और मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

चावड़ा ने कहा था, ‘‘यदि चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो राष्ट्रीय मुद्दे हावी हो जाएंगे और राज्यों के स्थानीय मुद्दे पीछे छूट जाएंगे।’’

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को समिति से मुलाकात की और एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया।

गुजरात दौरे के समापन के बाद बृहस्पतिवार को प्रेस को संबोधित करते हुए चौधरी ने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतिबिंब बताया, जिसका उद्देश्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलना है।

भाषा संतोष नरेश

नरेश