बीपीएससी परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों का प्रदर्शन हिंसक, पथराव के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज

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बीपीएससी परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों का प्रदर्शन हिंसक, पथराव के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 06:07 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 06:07 PM IST

पटना, 25 अगस्त (भाषा) बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर मंगलवार को पटना में हजारों विद्यार्थियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया।

मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और विद्यार्थियों के बीच कई स्थानों पर झड़प हो गयी।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन में शामिल अधिकांश अभ्यर्थी अगले महीने होने वाली बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई) में शामिल होने वाले हैं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बजाय एक ही चरण में कराई जाए।

कुछ अभ्यर्थियों ने इस वर्ष आयोजित संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (सीसीई) में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए उसे रद्द करने की भी मांग की।

गांधी मैदान से शुरू हुए मार्च में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) सहित कई वामपंथी छात्र एवं युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास तक करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

जदयू कार्यालय के निकट जेपी गोलंबर पर पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया लेकिन प्रदर्शनकारी डटे रहे।

पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्तिकेय शर्मा ने कहा, ‘‘हमने लगातार भीड़ से शांति बनाए रखने की अपील की और उन्हें प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से अपनी मांग संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रस्ताव दिया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया।’’

इसके बाद प्रदर्शनकारी अवरोधक तोड़कर डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के लाठीचार्ज और छात्रों द्वारा पथराव के दृश्य सामने आए हैं।

एक वीडियो में पुलिस अधिकारी एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारता दिखाई दे रहा है जबकि दूसरे वीडियो में एक महिला प्रदर्शनकारी सड़क किनारे बेहोश होकर गिरती नजर आ रही है।

हालांकि वीडिया की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी।

पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर विभिन्न स्थानों पर भेजा हालांकि हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई। अधिकारी ने बताया, ‘‘स्थिति अब नियंत्रण में है और यातायात बहाल किया जा रहा है। सड़क पूरी तरह खाली होने के बाद हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या बताई जाएगी। कुछ लोगों ने हिंसा का सहारा लिया, जिसे हमने रोका। कैमरों की फुटेज की जांच कर यह भी देखा जाएगा कि कहीं असामाजिक तत्व शामिल तो नहीं थे। कुछ लोग घायल हुए हैं, लेकिन हमारी प्राथमिकता सामान्य स्थिति बहाल करना है।’’ प्रदर्शन के दौरान कई छात्र सोमवार को बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमार सिंह की आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ भी नारेबाजी करते रहे।

छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस टिप्पणी को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की थी।

बाद में सिंह ने वीडियो जारी कर खेद जताया और कहा था कि उनका किसी की भावना आहत करने का इरादा नहीं था तथा उन्होंने केवल एक कहावत का इस्तेमाल किया था।

इस बीच, भाकपा (माले) लिबरेशन ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया, ‘‘दिल्ली से बिहार तक भाजपा का छात्र विरोधी चेहरा उजागर हो गया है।’’

पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने सरकार से दमनात्मक कार्रवाई तत्काल बंद करने, छात्रों से वार्ता करने और लाठीचार्ज में घायल लोगों को समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराने की मांग की।

मार्च में शामिल माकपा के राज्य सचिव मनोज चंद्रवंशी ने दावा किया कि विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों के अलावा एनएसयूआई, युवा कांग्रेस और छात्र राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल थे।

भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय ने कहा कि एआईएसएफ के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर कुमार भी हिरासत में लिए गए हैं और सभी बंदी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र