निवेश आकर्षित करने के लिए अनावश्यक नियम खत्म हों: सम्राट चौधरी

निवेश आकर्षित करने के लिए अनावश्यक नियम खत्म हों: सम्राट चौधरी

निवेश आकर्षित करने के लिए अनावश्यक नियम खत्म हों: सम्राट चौधरी
Modified Date: June 1, 2026 / 08:54 pm IST
Published Date: June 1, 2026 8:54 pm IST

पटना, एक जून (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को सभी विभागों को निवेश आकर्षित करने, कारोबार को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के लिए ‘‘अनावश्यक नियमों’’ को समाप्त करने तथा नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने का निर्देश दिया।

सम्राट ने कहा कि निवेश आकर्षित करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विनियमन-मुक्ति तथा प्रक्रियागत सुधार आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री पटना में अपने सरकारी आवास पर ‘अनुपालन में कमी और विनियमन-मुक्ति’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सम्राट ने कहा कि अनुपालन में कमी और विनियमन-मुक्ति के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देशों पर राज्य सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि व्यापार, औद्योगिक गतिविधियां, वाणिज्य और जनसेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकें।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पेश सुधारात्मक उपायों और भावी कार्ययोजनाओं का जायजा लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की भूमिका नागरिकों और उद्यमियों को सुविधा उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। उद्योगों, निवेशकों, स्टार्टअप, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों को सेवाएं हासिल करने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।’’

सम्राट ने अधिकारियों को डिजिटल मंचों को मजबूत करने, स्व-प्रमाणीकरण व्यवस्था का विस्तार करने, ऑनलाइन स्वीकृतियां सुनिश्चित करने और समयबद्ध सेवा वितरण की व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया।

उन्होंने विभागों से अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी लाइसेंस, अनुमतियां, निरीक्षण प्रक्रियाओं और प्रतिवेदन संबंधी आवश्यकताओं की समीक्षा कर निर्धारित समय सीमा के भीतर सरलीकरण के ठोस प्रस्ताव पेश करने को भी कहा।

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

भाषा

कैलाश पारुल

पारुल


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