लू से निपटने की तैयारी तेज, संवेदनशील इलाकों में जल एटीएम, टैंकर और ‘जलदूत’ तैनात : मंत्री
लू से निपटने की तैयारी तेज, संवेदनशील इलाकों में जल एटीएम, टैंकर और ‘जलदूत’ तैनात : मंत्री
पटना, 27 मई (भाषा) बिहार सरकार ने संभावित लू से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में जल एटीएम, जल टैंकरों और ‘जलदूतों’ की तैनाती के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में खराब चापाकलों की मरम्मत तेज कर दी है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के मंत्री संजय कुमार सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सिंह यहां विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को लेकर प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘संवेदनशील क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 475 जल टैंकर, कई जल एटीएम और ‘जलदूत’ तैनात किए गए हैं। इसके लिए विभागीय नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय कर दिए गए हैं।’’
मंत्री ने कहा कि विभाग ‘पेयजल ऐप’ के माध्यम से जल उपलब्धता की ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आईओटी) आधारित वास्तविक समय निगरानी प्रणाली का उपयोग कर रहा है, ताकि पेयजल आपूर्ति पर लगातार नजर रखी जा सके।
उन्होंने बताया कि 2025-26 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 1.13 लाख चापाकलों की मरम्मत की गई है।
हालांकि, विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार ने स्वीकार किया कि राज्य में अब भी करीब 86 हजार चापाकल खराब हैं, लेकिन उन्हें युद्धस्तर पर दुरुस्त करने का काम जारी है।
सिंह ने कहा कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष में उच्च गुणवत्ता वाले 100जल एटीएम स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिनका उपयोग श्रावणी मेले जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’
मंत्री ने बताया कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए राज्य में राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) मान्यता प्राप्त एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला, 38 जिला स्तरीय तथा 75 अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर ‘बहु-पैरामीटर फील्ड टेस्टिंग किट’ (एफटीके) और एच2एस वायल उपलब्ध कराए गए हैं तथा जांच संबंधी आंकड़े केंद्र सरकार के जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (डब्ल्यूक्यूएमआईएस) पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं, जिससे केंद्रीय स्तर पर निगरानी और रिपोर्टिंग की जाती है।
सिंह ने कहा कि विभाग ने संचालन एवं रखरखाव, नियमित मरम्मत, मोटर पंप खराबी, पाइपलाइन रिसाव, जलमीनारों की सफाई तथा जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है।
उन्होंने कहा कि आर्सेनिक, फ्लोराइड और लौह प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तृतीय पक्ष निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।
मंत्री ने कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर छूटे हुए टोले, विशेषकर महादलित बस्तियों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में 93 प्रतिशत से अधिक परिवारों को घरेलू जल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों की संख्या 2016 के 2.66 लाख से बढ़कर 2026 में 1.87 करोड़ हो गई है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2.02 करोड़ परिवारों तक पहुंचना है।
सिंह ने कहा कि सुरक्षित पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (सीजीआरसी) सक्रिय है।
उन्होंने बताया, ‘‘अगस्त 2025 से मई 2026 के बीच सीजीआरसी को 1.54 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 1.46 लाख शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।’’
भाषा कैलाश
राजकुमार
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