कुंवर और रत्नी बाई अभाव के ब्रांड एम्बेसडर 

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कुंवर और रत्नी बाई अभाव के ब्रांड एम्बेसडर 

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  • Publish Date - April 15, 2018 / 02:00 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 05:18 PM IST

हमारे घर में मेहमान आता है तो फटे सोफे पर कवर का पैबंद लगाया जाता है, ताकि मेहमान को अभाव का पता न लग सके। यह कहानी देश के हर उस मध्यवर्गीय परिवार की है, जो अभावों में रहकर भी खुश है। गरीब से गरीब भी मेहमान के आगमन पर अपने अभाव का भाव अपने चेहरे पर नहीं आने देता। इसलिए जब विदेशी मेहमान यहां भूखे नंगे लोगों की तस्वीर लेते हैं, तब हम कहते हैं कि उन्हें इस अमीर धरती में अभाव के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता। 

इस प्रस्तावना से आशय छत्तीसगढ़ की गरीबी और अभाव से है। यहां 44.61 फीसदी लोग गरीब हैं। लेकिन, बड़ा सवाल है कि क्या गरीबी को प्रचार के लिए और अभाव को लोकप्रियता के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 

एक वाकया है जिसमें धमतरी में अपनी बकरियां बेचकर शौचालय बनाने वाली बुजुर्ग महिला कुंवरबाई का प्रधानमंत्री के हाथों सम्मान हुआ। पीएम ने उनके पांव छूए तो कुंवरबाई अपनी मृत्यु तक इस तृष्णा में रही कि कब पीएम से उनकी दोबारा मुलाकात होगी। 

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यह सोचनीय विषय है कि एक बुजुर्ग महिला को जिससे ( बकरियां) वह अपने लिए दो वक्त की रोटी जुटाती है, उसकी कीमत पर उसे शौचालय बनाना पड़ा। क्या सिस्टम इतना लाचार है कि, शौचालय बनवाने लोगों की मदद नहीं कर सकता। 

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अब कुंवर बाई की मौत हुई तो सरकारी तंत्र को एक रत्नी बाई मिल गई। रत्नी बाई को चरणपादुका योजना में पीएम के हाथों चप्पल पहनने का सौभाग्य मिला और वह सुर्खियों में रही। जाहिर है कि पीएम किसी अनुसूचित जनजाति की किसी महिला को चप्पल पहनाने झुक जाए तो वो चर्चित होगी। 

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मगर, यह तस्वीर क्या देश की आजादी के बाद से अब तक शासन कर चुकी सरकारों के लिए शर्म की बात नहीं है ?  क्योंकि बस्तर के आदिवासी इतना भी सक्षम नहीं हो पाए कि टूटी फूटी कुर्सी पर पैबंद लगा सके। सरकारों को चाहिए कि अभाव में जीने वाले इतने सक्षम बन पाएं कि वे पैबंद (चप्पल) का जुगाड़ कर सके।  वैसे तो चप्पल से लेकर साड़ी तक बांटने की परंपरा है। लेकिन इसके अपने कायदे और फायदे हैं।  दिक्कत सिर्फ इस बात से है कि, जिन तस्वीरों पर देश को और छत्तीसगढ़ राज्य को सोचना चाहिए, उन तस्वीरों को देखकर सब उस मेहमान के भाव पर वाहवाही करते हैं, जिसने हमारे अभाव को सार्वजनिक कर दिया।

देवश तिवारी अमोरा , वरिष्ठ संवाददाता IBC 24