लखनऊ, 22 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में आग लगने के कारण झुलसने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई जबकि नौ लोग घायल हो गए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिये विशेष दल गठित करने का निर्देश दिया।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के जनसंपर्क अधिकारी के.के. सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बचाव दल ने इस घटना में घायल कुल 22 लोगों को केजीएमयू पहुंचाया, जिनमें से 15 को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल द्वारा जारी सूची के अनुसार हादसे में मरने वालों की शिनाख्त सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुछा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, शाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या के रूप में हुई है।
सूची के अनुसार हादसे में नौ अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।
इस मामले की जांच के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने देर रात हुई उच्चस्तरीय बैठक में एसआईटी के गठन का आदेश दिया।
बयान के अनुसार एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है और उसे सात दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री अलीगढ का दौरा बीच में ही छोड़कर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वह अस्पताल भी पहुंचे और घायल पीड़ितों से मुलाकात करके संवेदना प्रकट की।
देर रात, रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। बाद में उन्होंने केजीएमयू के ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना।
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा, ”मुख्यमंत्री ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।
इसके अलावा सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को पांच—पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।
अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजकर 15 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे का शिकार हुई तीन मंजिला इमारत की स्थिति का जायजा लिया और इमारत की ऊपरी मंजिलों का दौरा भी किया।
अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजकर 15 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे का शिकार हुई तीन मंजिला इमारत की स्थिति का जायजा लिया और इमारत की ऊपरी मंजिलों का दौरा भी किया।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों को पीड़ितों का हर संभव बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों के मुताबिक आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) को घटनास्थल पर जाकर हालात का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला वाणिज्यिक इमारत में अपराह्न करीब तीन बजे आग लगी। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों और ‘हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म’ वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया गया।
घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे नगर विकास और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने आग लगने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि आग शायद बिल्डिंग के एसी डक्ट से शुरू हुई और बाहर निकलने का सही रास्ता न होने के कारण धुएं से दम घुटने से लोगों की मौत हुई।
उन्होंने कहा कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय भाजपा विधायक नीरज बोरा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस हादसे में मरने वाले लोगों में से आधे स्थानीय निवासी थे।
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि उनमें से ज़्यादातर लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई है। इमारत में बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था और शायद यही वजह है कि यह हादसा इतना बड़ा हो गया।”
विधायक ने कहा, ”यह इलाका और जानकीपुरम कोचिंग हब बन गए हैं इसीलिए मैं लगातार इस इलाके के लिए एक फायर स्टेशन की मांग कर रहा था।”
अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान के दौरान आग में फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। कुछ लोगों को ‘बॉडी बैग’ में लाया गया, जबकि कुछ को कंबल में लपेटा गया था और एम्बुलेंस में ले जाते समय वे बेहोश लग रहे थे। इन लोगों के शवों या घायलों को बगल की इमारत की छत से बाहर निकाला गया।
भाषा सलीम आनन्द जोहेब
जोहेब