आइये आज कोरोना से लड़ने के लिए घर मे ही रहें और समय का सदुपयोग करते हुए अपने मौलिक कर्तव्य को जानें …. एच पी जोशी

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आइये आज कोरोना से लड़ने के लिए घर मे ही रहें और समय का सदुपयोग करते हुए अपने मौलिक कर्तव्य को जानें .... एच पी जोशी

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  • Publish Date - April 4, 2020 / 05:33 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 09:23 AM IST

देश के प्रत्येक नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों के साथ साथ अपने मूल कर्तव्य से भी भलीभांति परिचित होना चाहिए। प्रायः देखने मे आता है, चाहे वह किसी भी देश के नागरिक हों अक्सर वे अपने अधिकारों के लिए अधिक सजग रहते हैं, उसे पाने के लिए लंबी लड़ाइयां लड़ते रहते हैं जबकि अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक भी नहीं होना चाहते, यही दुर्भाग्यजनक कारण देश में वर्ग संघर्ष और हिंसा का कारण बनता है। अतः आइए हम अपने मूल कर्तव्य को जानें और इन्हें अपने जीवनशैली में शामिल करें।

भारत का संविधान, अध्याय-19 मूल कर्तव्य {अनुच्छेद 51 (क)} में विद्यमान है इसके तहत हमारा राष्ट्र भारत आपसे आह्वान है, आप आप सदैव :-
(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखें और उसका पालन करें।
(ग) – भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और अक्षणु बनाए रखें।
(घ) देश की रक्षा करें एयर आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
(ङ) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें, जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हों; ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हों।
(च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें और उसका परिरक्षण करें।
(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की; जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव भी शामिल हैं, रक्षा करें, उसका संवर्धन करें तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखें।
(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
(झ) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
(Eya) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों मे उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले।
(ट) अपने 6-14 वर्ष के बच्चे के माता पिता और प्रतिपाल्य उन्हें शिक्षा का अवसर प्रदान करें।

साथियों, अब आप अपने मौलिक कर्तव्य से भली भांति अवगत हो चुके हैं। अतः आपसे अनुरोध है अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में इन बातों का ख्याल रखें जिससे देश में एकता और अखंडता स्थापित किया जा सके।

 

लेखक शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर है, वर्तमान में IGNOU से मानव अधिकार में सर्टिफिकेट कोर्स कर रहा है।

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