BREAKING NEWS
रिटायर्ड IAS हत्याकांड का संदिग्ध गिरफ्त से दूर

Memories of Badra Saheb: यादों में शेरों के शहंशाह, बद्र मतलब सिर्फ शायर नहीं आदमी वे बड़े दिल वाले थे…

बरुण सखाजी करीब 20 साल पुरानी बात रही होगी। बद्र साहब की उम्र कमोबेश 70-71 थी। हम लोग उस वक्त एक वीकली वीडियो मैगजीन और मंथली प्रिंट मैगजीन निकालते थे। …

Memories of Badra Saheb

Memories of Badra Saheb

Barun Shrivastava
Published: 29 May 2026 | 8:55 pmModified: 09 Jul 2026 | 10:26 pm

बरुण सखाजी

करीब 20 साल पुरानी बात रही होगी। बद्र साहब की उम्र कमोबेश 70-71 थी। हम लोग उस वक्त एक वीकली वीडियो मैगजीन और मंथली प्रिंट मैगजीन निकालते थे। प्लान हुआ एमपी के शहर रायसेन के नया बसस्टैंड (उस वक्त नया) पर एक विशाल कवि सम्मेलन करवाया जाएगा। हौसला जुटाने की जिम्मेदारी हमारे प्रोजेक्ट के मेंटर नीरज निगमजी की थी। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार हुई। तय हुआ इस सम्मेलन को ऐसा करके दिखाना है कि रायसेन में इतिहास बन जाए। मतलब साफ था, बड़े से बड़े कवियों को लाना होगा। नीरजजी ने तय किया बड़े कवियों में शायर बशीर साहब, मंजर भोपाली, गोपालदास नीरज को बुलाया जाएगा। नीरजजी जो ठान लें वह करके दिखाने में कभी पीछे नहीं हटते थे। अपने संपर्कों से कवियों की तलाश शुरू हुई। सत्यनारायण सत्तन, ओम व्यास, माणिक वर्मा, सुरेंद्र शर्मा, गोपालदास नीरज, बशीर बद्र, मंजर भोपाली समेत करीब 20 कवियों की लिस्टिंग की गई। वह दौर वॉट्सएप या वेबसाइट के उत्कर्ष का नहीं था। जो भी था वह टेलेफोनिक या महंगी मोबाइल कॉलिंग का था।

इन कवियों से संपर्क के दौरान एमपी के एक आईएएस अफसर ने बताया एक कवि गाजियाबाद का भी अच्छा है। उसकी कविताएं अक्सर इंजीनियरिंग कॉलेजों में गूंजा करती हैं। उन्होंने गुनगुनाया... कन्हैया की बांसुरी को गोपियां समझती हैं। हमे अच्छा लगा। यंगस्टर्स उसके फॉलोवर्स हैं। अफसर साहब ने नंबर दिया। वर्ष 2005 में कवि कुमार विश्वास महज 15 हजार रुपए में गाज़ियाबाद से रायसेन तक अपने खर्च पर आने तैयार हो गए। साथ में वादा किया बशीर साहब के मिजाज का होगा तो मैं उन्हें लेकर आऊंगा।

संभवतः भोपाल गेट के पास प्रिंस कॉलोनी में उनका निवास था। राज्य सरकार ने उन्हें उस वक्त उर्दू अकादमी का चेयरमैन बना रखा था। वे मुल्ला रमूजी भवन में नियमित आया करते थे। नीरज निगम साहब और मैं एक दिन अल सुबह उनके निवास जा पहुंचे। अपना परिचय दिया तो उन्होंने बताया हां उस लड़के का फोन आया था आप लोगों के लिए। लड़के से तात्पर्य कुमार विश्वास था। बद्र साहब ने बहुत आत्मीयता से हमे बिठाया। उनका घर यादों के आधार पर बोलूं तो कुछ यूं था कि एक गली में कोने पर मुड़ते ही छोटा सा पोर्च था, जिसमें उस वक्त की स्वफ्टि कार खड़ी थी। आगे दालाननुमा बैठकी। बद्र साहब दो-तीन लफ्ज़ों में ही हमे अपने इस दालान के बाद के ड्राइंग रूम में ले गए। उसी छोटे कमरे में एक तरफ वे बैठे दूसरी तरफ हम और तीसरी तरफ उनकी पत्नी थी। एक कोने में बिस्तर पर सोये हुए थे बद्र साहब के पुत्र। बद्र साहब की पत्नी ने उन्हें उठाया। एक छोटी उम्र का बच्चा चादर से निकला। हमने सहसा पूछा किस क्लास में हैं। बताया गया नवमीं पढ़ते हैं साहबजादे। बड़े विनम्र मिजाज बद्र साहब, उनकी पत्नी और बेटे भी। बेटे ने हमारा अभिवादन पैरों की ओर झुककर किया। बद्र साहब के चेहरे पर फख्र उभर आया। बेटे में ऐसे संस्कार देखकर हम भी गौरव में झूम उठे।

चाय, काफी का दौर चला। बद्र साहब से निवेदन किया, चूंकि हमारा सारा कार्यक्रम बजट बाउंड था। इसलिए हम जानना चाहते थे वे क्या चार्ज करेंगे। लेकिन गज़ब बद्र साहब गज़ब थे आप। एक शब्द नहीं बोला उन्होंने। वास्तव में एक पैसा लिया भी नहीं। बल्कि हमसे रास्ता पूछते रहे कि रायसेन के लिए कैसे और कहां से जाते हैं। क्या कोई बस चला करती है। हम जवाब देते गए। वे पूछते गए, लेकिन उन्होंने एक बार भी नहीं कहा कि मेरे लिए कोई गाड़ी भेज देना। आखिर तक हम उन्हें बोलते रहे साहब गाड़ी और ड्रायवर आ जाएंगे। आप अपना समय बता दीजिए। बद्र साहब बोले लड़के (कुमार विश्वास) ने बोला है तो मैं न जाऊं ऐसा हो नहीं सकता। वह हुनरमंद लड़का है। बहुत ऊपर जाएगा। वे जानना चाहते थे कौन-कौन आएंगे। हम बताने की स्थिति में नहीं थे। नाम तो बहुत थे कन्फर्मेशन सिर्फ कवि कुमार विश्वास का था। माणिक वर्मा ने तो सुरेंद्र शर्मा को अपनी जूठन बताकर उनके बराबर फीस से एक रुपए कम न लेने का कहकर चलता कर दिया था। गोपालदास नीरजजी के एक सहयोगी सुधांशु जी ने साफ फोन पर ही बोल दिया था साहब की तबियत ठीक नहीं है। यूपी सरकार में राज्यमंत्री हैं आप उन्हें क्या छोटा समझते हैं। हर कहीं मुंह उठाकर चले आएंगे क्या। गोपालजी का मैं बड़ा फैन था। उनके इन सहयोगी का जवाब मुझे असहज कर गया। सत्तन भी इन्कार कर चुके थे। ओम व्यास के पास तारीख नहीं थी। हरिओम पवार मुख्यमंत्री को बुलाओ तो आएंगे बोल रहे थे। उस समय विश्वास इतने बड़े आदमी नहीं थे, जिनके नाम पर लोग खिंचे आएं या कवियों में ही वे प्रचलित थे। कुमार विश्वास को माणिक वर्मा, हरिओम पवार, ओम व्यास जैसे कवियों ने तो पहचानने से भी इन्कार कर दिया था।

बद्र साहब के सामने हम झूठ नहीं बोलना चाहते थे। नीरजजी ने सच बताया। बद्र साहब मुस्कुराए और बोले, ख़ैर ये मेरे लिए मैटर नहीं करता। मैं कोई इतना बड़ा आदमी नहीं हूं। मैं आऊंगा, कहां से बताया आपने बसें जवाहर चौक से मिला करती हैं। हमने हां में सिर तो हिलाया लेकिन कहा भी गाड़ी ड्रायवर आपके वक्त पर आ जाएंगे। वे बोले अच्छा एक काम कीजिए आप तो सिर्फ ड्रायवर भेज दीजिए। स्टेट गवर्नमेंट ने मुझे ये गाड़ी दी हुई है। अपनी पत्नी की ओर देखते हुए वे कहते हैं शायद महीने का कुछ तेल भी देते हैं हुकुमत के लोग। सिर्फ़ चलाने वाला कोई भेज दीजिए। हमने राहत की सांस ली। पत्नी बोली, भैया आप लोग गाड़ी, ड्रायवर भेज दीजिएगा। वे इस उम्र में बस का सफर नहीं कर पाएंगे। अब चूंकि उन्होंने आपको ज़ुबान दे दी है, तो जाएंगे जरूर। थोड़ा जल्दी फ्री करवा दीजिएगा। रात-रातभर जागना मुश्किल होगा। हम ख़ुश थे। क्योंकि बद्र साहब का कवि सम्मेलन में आना चार नहीं हजार चांद लगाने वाला था। इतनी सहजता से हां कहना और वक्त पर आना हमे हैरत में डाल गया। रात करीब 11 बजे शुरू हुए इस कवि सम्मेलन में क्या तो भीड़ उमड़ी और क्या कवि। कुमार विश्वास, राणा ज़ेबा, बशीर बद्र समेत कुछ स्थानीय कवियों का बड़ा मंच बन गया। हम जैसे छोटे मीडिया उद्यमियों के लिए यह बड़ी कामयाबी थी। इस इवेंट की कामयाबी का सारा श्रेय बद्र साहब को जाता है। नेचुरली नीरज निगम जी को जाता है जिन्होंने हारे बिना इसे साकार कर दिखाया और कुमार विश्वास को भी जिन्होंने हमे अपने घर पर लंच के लिए आमंत्रित किया और हम महीनेभर बाद उनके गाज़ियाबाद वाले घर पर थे। यह किस्सा किसी और दिन। बद्र साहब के शेयर ज़ेहन में हों न हों, व्यक्तित्व मेरे ज़ेहन में सदा रहेगा। भावनात्मक श्रद्धांजलि।

हमसे जुड़ें
FacebookTwitterInstagramMSNGoogle NewsYouTube

लेखक के बारे में

Barun Shrivastava
Barun Shrivastava

Associate Executive Editor, IBC24 Digital

और भी पढ़ें...

Web Title: nindakniyre- Memories of Badra Saheb