Birth and Death Registration: जन्म, मृत्यु पंजीयन के नए प्रावधान 1 अक्टूबर से होंगे लागू.. सख्त होगी प्रक्रिया, आवेदन में देरी तो मजिस्ट्रेट का लिखित आदेश जरूरी

जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी से जुड़े नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। संशोधित कानून के तहत एक से दो साल के भीतर पंजीकरण कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का लिखित आदेश जरूरी होगा। दो साल या उससे अधिक देरी होने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट आदेश की आवश्यकता होगी।

Birth and Death Registration: जन्म, मृत्यु पंजीयन के नए प्रावधान 1 अक्टूबर से होंगे लागू.. सख्त होगी प्रक्रिया, आवेदन में देरी तो मजिस्ट्रेट का लिखित आदेश जरूरी

Birth and Death Registration New Provisions || Image- File Pic

Modified Date: September 17, 2026 / 11:10 pm IST
Published Date: September 17, 2026 11:07 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 1 अक्टूबर से नए नियम होंगे लागू
  • देरी पर मजिस्ट्रेट का लिखित आदेश जरूरी
  • दो साल बाद कोर्ट आदेश अनिवार्य होगा

Birth and Death Registration New Provisions: नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी से जुड़े नियमों को सख्त बनाने वाले नये कानून के प्रावधान एक अक्टूबर से लागू होंगे। भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने बुधवार को यह जानकारी दी। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को हाल में संसद के दोनों सदनों ने पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक ने पिछले महीने कानून की शक्ल अख्तियार कर ली।

IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़े

देर होने पर न्यायिक दखल की जरूरत

नारायण ने एक गजट अधिसूचना में कहा, “जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 (2026 का 12) की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार एक अक्टूबर 2026 को उस तारीख के रूप में तय करती है, जब इस कानून के प्रावधान लागू होंगे।”

Birth and Death Registration New Provisions: यह कानून जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी की सूरत में लागू होने वाले नियमों को और सख्त बनाता है और घटना के दो साल बाद किए गए आवेदनों के लिए न्यायिक दखल की जरूरत का प्रावधान करता है।

क्या थे पुराने नियम और क्या है नया कानून?

मूल ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ (जिसमें वर्ष 2023 में भी संशोधन किया गया था) की धारा 13(3) में बदलाव करके देर से होने वाले पंजीकरण के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त बना दिया गया है। कानून के तहत मिलने वाला बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट किसी भी नागरिक के लिए प्राथमिक कानूनी पहचान और दस्तावेजी सबूत होता है। नए संशोधन के तहत पंजीकरण कराने की समय-सीमा के आधार पर कानूनी प्रक्रिया को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है।

Birth and Death Registration New Provisions: नए संशोधन के तहत यदि जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष के बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश की आवश्यकता होगी।

IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे Instagram Page को Follow करें

इसमें निर्धारित फीस देने के साथ ही संबंधित अधिकारी द्वारा घटना की सत्यता की जांच करना अनिवार्य होगा। यदि आवेदन घटना घटित होने के दो वर्ष या उससे अधिक समय बाद किया जाता है, तो प्रशासनिक स्तर पर इसका निपटारा नहीं हो सकेगा। इसके लिए कानून में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के औपचारिक कोर्ट आदेश की अनिवार्यता लागू की गई है। उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और कोर्ट के आदेश के बिना कोई भी रजिस्ट्रार दो साल से पुराना पंजीकरण दर्ज नहीं कर सकेगा।

इन्हें भी पढ़ें:

पाकिस्तान मक्का समझौते के तहत अपने दायित्व निभाने के लिए तैयार: ख्वाजा आसिफ

एशियाड महिला क्रिकेट : बांग्लादेश खेले बिना सेमीफाइनल में, पाकिस्तान ने थाईलैंड को हराया

मुंबई: संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण बाघिन ‘बिजली’ की मौत

टाटा संस के निदेशक मंडल ने चंद्रशेखरन को फिर चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया

भारत को यूरोपीय संघ से 28 लाख टन इस्पात निर्यात का कोटा मिला : अधिकारी


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown