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Digital Mahakumbh Experience Center: डिजिटल से मिलेगा ओरिजनल एक्सपीरियंस.. धक्का-मुक्की से बचने AI की नजर से देखें महाकुंभ का भव्य नजारा

देवताओं के दूत के रूप में जाने जाने वाले नारद मुनि की विशेषता वाला एक इंटरैक्टिव होलोबॉक्स, कुंभ के बारे में आकर्षक कहानियाँ सुनाता है और अपनी आकर्षक आवाज़ में …

Digital Mahakumbh Experience Center

Digital Mahakumbh Experience Center

satya prakash
Published: 17 Jan 2025 | 8:55 pmModified: 17 Jan 2025 | 8:55 pm

Digital Mahakumbh Experience Center : प्रयागराज: अगर आप प्रयागराज महाकुंभनगर आ रहे हैं और संगम स्नान करने के बाद महाकुंभ मेले में धक्का मुक्की से बचना चाहते हैं। तो आपके लिए यहां पर एक अद्भुत व्यवस्था की गई है। डिजिटल अनुभूति केंद्र के जरिए आप पूरे महाकुंभ मेले को देख सकते हैं, और इसकी सुखद अनुभूति कर सकते हैं। महाकुंभ नगर में 60 हजार वर्ग फीट में डिजिटल अनुभूति केंद्र की स्थापना की गई है।

AI तकनीक से प्रयागराज में डिजिटल महाकुंभ अनुभूति केंद्र बनाया गया है। इसमें वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लीडार) तकनीक, LED डिस्प्ले और होलोग्राम का इस्तेमाल कर महाकुंभ मेले के पीछे की पौराणिक कहानियों को डिजिटल रूप से चित्रित किया गया है। डिजिटल अनुभूति केंद्र को 12 क्षेत्रों में डिवाइड किया गया है। "IBC 24" पर देखिए शानदार तकनीकी से लैस डिजिटल अनुभूति केंद्र का चित्रण।

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Digital Mahakumbh Experience Center : महाकुंभ मेले की कहानी, AI और वर्चुअल रिएलिटी (VR) की जुबानी!! 144 सालों बाद प्रयागराज में महाकुंभ मेले की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन महाकुंभ मेले की शुरुआत कैसे हुई? महाकुंभ मेले का इतिहास क्या है? इन सारी बातों को अनुभव किजीए AI के जरिए। इसके बावजूद अगर आपके मन में कोई सवाल रह जाता है तो बेझिझक होकर वर्चुअल रिएलिटी के माध्यम से इसे पूछ डालिए नारद मुनि से। है न मजेदार...!

महाकुंभ मेला में डिजिटल अनुभूति केंद्र उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल महाकुंभ मेले को पूरी तरह से डिजिटल बना दिया है। मेले की निगरानी में जहां AI कैमरों की मदद ली जा रही है, वहीं मेला से संबंधित जानकारियों के लिए मोबाइल ऐप को AI की शक्ति दी गयी है। इसके साथ-साथ महाकुंभ मेला में डिजिटल अनुभूति केंद्र (Digital Experience Center) भी बनाया गया है, जहां AI के माध्यम से लोगों को महाकुंभ मेले के इतिहास, पौराणिक कथाओं आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी।

Digital Mahakumbh Experience Center : ऐसा पहली बार हो रहा है जब महाकुंभ मेला इतना हाईटेक बनाया गया हो। महाकुंभ मेला परिसर में लगभग 60,000 वर्गफीट के क्षेत्र में यह सेंटर बनाया गया है जहां देश के विभिन्न मंदिरों आदि का लकड़ी से बनाया हुआ मॉडल भी रखा गया है।

क्या है डिजिटल अनुभूति केंद्र (Digital Experience Center)?

डिजिटल अनुभूति केंद्र मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिमाग की ही उपज है, जिसे नोएडा के एक इवेंट मैनेजमेंट फार्म ने अमली जामा पहनाया है। महाकुंभ में आने वाले देसी तीर्थ यात्रियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी भारत के इतिहास और इसकी संस्कृति से रू-ब-रू चाहते थे।

Digital Mahakumbh Experience Center : इस सेंटर में जो कुछ भी प्रदर्शित किया गया है, वह पूरी की पूरी कलाकृति मेला परिसर में ही लकड़ी और हैंडक्राफ्ट से बनाया गया है। पूरे सेंटर को बनाने का काम मात्र 21 दिनों में पूरा किया गया है। कलाकृतियों में न तो कुछ रेडीमेड खरीदा गया है और न ही बाहर मंगवाया गया है। सब कुछ यहीं बनाया गया है। पूरे डिजीटल अनुभूति केंद्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल रिएलिटी (VR), ऑग्मेंटेड रिएलिटी (AR), LED डिस्प्ले और होलोग्राम से सजाया गया है।

क्या-क्या मिलेगा अनुभव?

जैसे ही कोई व्यक्ति/तीर्थ यात्री डिजीटल अनुभूति केंद्र में प्रवेश करेगा, सबसे पहले उसे प्रोजेक्शन पर महाकुंभ मेले का ट्रेलर दिखाया जाएगा। इसके बाद लकड़ी की दीवार पर प्रोजेक्शन के माध्यम से समुद्र मंथन की कहानी को दिखाया जाएगा। आगे बढ़ने पर लोग यमुनोत्री ग्लेशियर को AI और VR के माध्यम से अनुभव कर सकेंगे। सबसे मजेदार बात यह होगी, कि जब भी कोई व्यक्ति अपनी हाथ इस प्रोजेक्शन के सामने हिलाएगा या लहराएगा, यमुना नदी में भी लहरे पैदा होने जैसी दिखाई देगी। यहां प्रयाग महात्मम और त्रिवेणी संगम जैसी कहानियां भी दिखाई जाएंगी। अगर इन सारी कहानियों के बावजूद आपके मन में कोई जिज्ञासा रहती है या कोई सवाल पैदा होता है, तो लोग VR के माध्यम से सीधे नारद मुनि से संपर्क कर सकते हैं और उनसे अपने सवाल भी पूछ सकते हैं।

डिजिटल अनुभूति सेंटर का विवरण कहां?

Digital Mahakumbh Experience Center : यह डिजिटल सेंटर महाकुंभ मेला परिसर के सेक्टर 3 में बनाया गया है। टिकट शुल्क - ₹50 प्रति व्यक्ति शो का समय - सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रतिदिन शो चलाया जा रहा है। सिर्फ दोपहर 2 से 3 बजे के बीच इसे बंद रखा जाता है। कब से खुलेगा - डिजीटल अनुभूति केंद्र का उद्घाटन 9 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी द्वारा किया जा चुका है। बताया जाता है कि महाकुंभ मेले के शुरू होने से पहले ही हर दिन लगभग 3000-4000 दर्शक यहां आ रहे हैं। मेला शुरू होने के बाद दर्शकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।

जोन 1 - तीर्थराज प्रयाग

बाहरी हिस्से के शांत नीले रंग के साथ खूबसूरती से विपरीत, एक आकर्षक लाल स्क्रॉल ध्यान आकर्षित करता है, जो इस भव्य सभा से जुड़ी कहानियों को बयान करता है। आगे बढ़ते हुए, कुंभ की उत्पत्ति को उजागर करने वाली एक सजावटी भित्ति पृष्ठभूमि के सामने स्थापित, प्रदर्शन ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए, कूर्म अवतार और पुराणों के अंशों की उपस्थिति से समृद्ध है। एक आधुनिक और अद्वितीय पर्दा प्रक्षेपण आगंतुकों की यात्रा शुरू करता है, जो कुंभ की कालातीत कहानी और उनके इंतजार में भव्य रोमांच की एक मनोरम पूर्वकथा पेश करता है।

जोन 2 - नीलकंठ: ब्रह्मांड के रक्षक

शक्ति और करुणा के प्रतीक भगवान शिव को समुद्र मंथन के दौरान उनके अद्वितीय बलिदान के लिए नीलकंठ, यानी नीले गले वाले के रूप में पूजा जाता है। जब ब्रह्मांडीय विनाश की धमकी देने वाला घातक हलाहल विष उभरा, तो सृष्टि की रक्षा के लिए शिव ने निस्वार्थ भाव से इसे अपने गले में धारण कर लिया। उनकी शांत लेकिन शक्तिशाली उपस्थिति असीम धैर्य, साहस और दिव्य करुणा का प्रतीक है, जो साधकों को शांति और मुक्ति की ओर उनकी यात्रा के लिए प्रेरित करती है। इस गहन सार को शिव की एक भव्य मूर्ति द्वारा खूबसूरती से कैद किया गया है, जो ब्रह्मांडीय लय में लहराते गतिज घंटी के पर्दे और आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंजती घंटियों से भरा एक कमरा है।

जोन 3: महाकुंभ की भव्य कथा

Digital Mahakumbh Experience Center : यह क्षेत्र तीन प्रमुख कृत्यों में प्रकट होता है: कारण, घटना और प्रभाव। यात्रा पहले अंक से शुरू होती है, जिसमें ऐरावत की एक राजसी मूर्ति को दिखाया गया है, जो ऋषि दुर्वासा की एक तस्वीर के बगल में गर्व से खड़ी है, जो इस घटना के कारण भगवान इंद्र को फूलों की माला भेंट कर रही है। दूसरा भाग एक मनोरम प्रक्षेपण फिल्म के माध्यम से समुद्र मंथन की महाकाव्य कहानी को जीवंत करता है, उन घटनाओं को उजागर करता है जिनके कारण समुद्र का पौराणिक मंथन हुआ, अमरता के अमृत की उत्कट खोज और भारत के चार कुंभ स्थलों की पवित्र उत्पत्ति हुई। अनुभव को बढ़ाते हुए, वीआर ज़ोन आगंतुकों को नाग वासुकी के प्रतीक रस्सी को शारीरिक रूप से खींचकर मंथन में भाग लेने की अनुमति देता है। अंतिम अधिनियम में चार कुंभ स्थलों की शानदार दीवार भित्तिचित्र और मूर्तियों के साथ मंथन के परिणाम को दर्शाया गया है, जहां आगंतुक एक प्रक्षेपण फिल्म देख सकते हैं जो इन पवित्र स्थानों के महत्व पर प्रकाश डालती है।

जोन 4: त्रिवेणी संगम

यह क्षेत्र प्रयागराज और कुंभ, त्रिवेणी संगम के सार को दर्शाता है, जहां राजसी गंगा, यमुना और सरस्वती अपने पूरे वैभव के साथ मिलती हैं। एक मिश्रित मीडिया वॉल डिस्प्ले एक अविस्मरणीय इंटरैक्टिव अनुभव प्रदान करता है, जिसमें एक LiDAR-सक्षम भित्ति चित्र है जो इन पवित्र नदियों के पाठ्यक्रम का पता लगाता है। जैसे ही आगंतुक मार्ग के अंत तक पहुंचते हैं, उनका स्वागत देवी सरस्वती के होलोग्राफिक अवतार द्वारा किया जाता है, जो मधुर और मनमोहक आवाज के साथ उनके महत्व को बताती है, जिससे वे अपनी दिव्य उपस्थिति से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

जोन 5: कुंभ में अनुष्ठान

Digital Mahakumbh Experience Center : त्रिवेणी संगम के गहन महत्व पर आधारित, यह क्षेत्र कुंभ मेले के पवित्र अनुष्ठानों की पड़ताल करता है। इसकी शुरुआत एक गहन कमरे से होती है जो एक शांत ऑडियो-विज़ुअल अनुभव के माध्यम से शाही स्नान को चित्रित करता है। इसके बाद पर्यटक दो घुमावदार एलईडी स्क्रीन वाले एक खंड में चले जाते हैं, जो घाटों पर एक मनोरम सूर्यास्त का दृश्य बनाते हैं और पवित्र स्थल की शांत सुंदरता को कैद करते हैं। एक तरफ, वे डिजिटल रूप से दीयों को पानी में छोड़ने के लिए बटन दबा सकते हैं, जो दीप दान की प्रतिष्ठित रस्म का एक आभासी अनुभव प्रदान करता है। दूसरी ओर, नावों की तरह डिजाइन किए गए डेक को देखने से आगंतुकों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे त्रिवेणी संगम के किनारे एक शांत नाव की सवारी कर रहे हैं, जो उन्हें कुंभ के आध्यात्मिक सार के करीब लाता है।

जोन 6: अतीत का कुंभ

यह क्षेत्र एक दृश्य अंतराल के रूप में कार्य करता है, जो कुंभ की अनुष्ठानिक यात्रा को लौकिक कथा से अलग करता है। एक मनोरम मार्ग के रूप में डिज़ाइन किया गया, यह एक फोटो गैलरी के रूप में कार्य करता है जो कुंभ का सिनेमाई दृश्य चित्रण पेश करता है, जो आगंतुकों को त्योहार की भव्यता और कालातीत आकर्षण में डुबो देता है।

जोन 7: दिव्य संगम

Digital Mahakumbh Experience Center : कुंभ मेले के दिव्य महत्व के माध्यम से एक गहन यात्रा में कदम रखें, जहां ज्योतिष और आध्यात्मिकता सद्भाव में एकजुट होते हैं। यह गैलरी उत्सव के दौरान बृहस्पति, चंद्रमा और सूर्य के पवित्र संरेखण को प्रदर्शित करती है, जिसमें सूचनात्मक पैनल और एक मंत्रमुग्ध एलईडी छत है जो एक तारामंडल अनुभव का अनुकरण करती है। भीतर के ब्रह्मांड पर प्रकाश डालते हुए, इस क्षेत्र में ध्यान कर रहे योगी पर सप्तचक्रों का एक मनोरम लेजर प्रक्षेपण होता है, जो बाहरी और आंतरिक संरेखण को एक आधुनिक तमाशे में मिश्रित करता है।

जोन 8: अध्याय 07: कुंभ के अखाड़े

यह गैलरी प्राचीन अखाड़ों की गहन खोज, उनके विकास का पता लगाने और आध्यात्मिक शिक्षा और तपस्वी प्रथाओं के केंद्र के रूप में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालने की पेशकश करती है। यह दशनामी, वैरागी और उदासीन संप्रदायों में उनके विभाजन पर भी प्रकाश डालता है। एक आकर्षक चार-भाग वाला सुरंग प्रदर्शन अमूर्त और रचनात्मक दृश्यों के माध्यम से अखाड़ों की उत्पत्ति, प्रथाओं और महत्व को जीवंत करता है। इसके अतिरिक्त, 13 ऊंचे स्तंभ कुंभ में 13 आधिकारिक अखाड़ों को समर्पित हैं, जो उन समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो इस भव्य आध्यात्मिक सभा की रीढ़ हैं।

जोन 9: बुद्धि स्क्रॉल

Digital Mahakumbh Experience Center : यह इंस्टॉलेशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ, सद्गुरु, सुषमा स्वराज और अन्य प्रभावशाली हस्तियों के ज्ञान और दृष्टिकोण को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिन्होंने अपनी गहन अंतर्दृष्टि साझा की है और/या कुंभ का अनुभव किया है। यह विविध पृष्ठभूमि के व्यक्तियों पर कुंभ के दूरगामी प्रभाव को उजागर करता है, यह दर्शाता है कि यह त्योहार जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ कैसे जुड़ता है।

जोन 10: साहित्यिक गूँज

यह गैलरी एक इंटरैक्टिव फ्लिपबुक प्रक्षेपण प्रस्तुत करती है जो कुंभ मेले के ऐतिहासिक और साहित्यिक विवरणों को जीवंत करती है, जो ह्वेन त्सांग की 7 वीं शताब्दी की यात्रा जैसे प्राचीन अभिलेखों से लेकर त्योहार की समकालीन विशेषताओं और प्रसिद्ध प्रकाशनों में इसके महत्व तक फैली हुई है। समय के साथ जमे हुए पृष्ठों की स्थापना, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर कुंभ के लगातार बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है, इसके स्थायी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव पर जोर देती है।

जोन 11: कुंभ की कहानियाँ

Digital Mahakumbh Experience Center :  यह गैलरी प्रोफेसरों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और आयोजक सदस्यों के प्रत्यक्ष विवरण को एक साथ लाती है, जो कुंभ मेले के केंद्र में मौजूद अनुभवों और भावनाओं की एक समृद्ध पच्चीकारी पेश करती है। यह कुंभ के गहरे प्रभाव को उजागर करने का प्रयास करता है, यह दर्शाता है कि यह कैसे है और अभी भी इसके आसपास के लाखों लोगों के जीवन को बदल रहा है।

जोन 12: बातचीत

देवताओं के दूत के रूप में जाने जाने वाले नारद मुनि की विशेषता वाला एक इंटरैक्टिव होलोबॉक्स, कुंभ के बारे में आकर्षक कहानियाँ सुनाता है और अपनी आकर्षक आवाज़ में त्योहार के बारे में सवालों के जवाब देता है। एक बैकलिट दीवार भित्तिचित्र कुंभ से जुड़े तत्वों और पात्रों को प्रदर्शित करते हुए अनुभव की सराहना करता है।

जोन 13: कुंभ की झलकियां

Digital Mahakumbh Experience Center :  अंत में, आगंतुक एक गहन, गोलाकार सभागार में कदम रखते हैं जहां वे कुंभ मेला 2025 के जीवंत ऑडियो-विजुअल से घिरे रहते हैं। इसके विपरीत, एक शानदार फोटो वॉल डिस्प्ले उत्सव के दौरान कैप्चर किए गए आश्चर्यजनक दृश्य क्षणों को प्रदर्शित करता है। यह अंतिम क्षेत्र यात्रा के समापन के रूप में कार्य करता है, जिससे आगंतुकों को कुंभ की भव्यता और भावना की अविस्मरणीय यादें मिलती हैं।

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

उत्तर: यह प्रयागराज महाकुंभ मेला परिसर में स्थित है।

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लेखक के बारे में

satya prakash
satya prakash

A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown

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Web Title: Digital Mahakumbh Experience Center, It has become a center of attraction for everyone in Prayagraj

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