भारत की पुरुष और महिला स्क्वाश टीम को कांस्य पदक
भारत की पुरुष और महिला स्क्वाश टीम को कांस्य पदक
(फिलेम दीपक सिंह)
नागोया, एक अक्टूबर (भाषा) गत चैंपियन भारतीय पुरुष टीम का बृहस्पतिवार को एशियाई खेलों की स्क्वाश प्रतियोगिता में अपना खिताब बचाए रखने का सपना टूट गया और सेमीफाइनल में मलेशिया से 1-2 से हारने के कारण उसे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
भारतीय महिला टीम भी तन्वी खन्ना की शानदार वापसी के बावजूद हांगकांग से 1-2 से हार गई और उसने भी अपने अभियान का अंत कांस्य पदक से किया। महिला वर्ग में स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह की पहले मैच में हार निर्णायक साबित हुई।
स्क्वाश में कुल मिलाकर भारत ने एकल में दो रजत पदक, टीम स्पर्धा में दो कांस्य पदक और मिश्रित युगल में एक कांस्य पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
भारत का पदक पहले ही को पक्का हो चुका था और 18 वर्षीय अनाहत पर काफी जिम्मेदारी थी। भारत की नजरें पिछले हांगझोउ एशियाई खेलों के प्रदर्शन में सुधार पर थी। हालांकि विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज अनाहत ने चार मैच प्वाइंट गंवाए और दुनिया की 25वें नंबर की खिलाड़ी सिन युक चान के खिलाफ रोमांचक मुकाबले में 2-3 (11-9, 11-8, 6-11, 11-13, 10-12) से हार गईं।
इसके बाद दुनिया की 73वें नंबर की खिलाड़ी तन्वी ने शानदार वापसी करते हुए दुनिया की 40वें नंबर की खिलाड़ी का यी ली को 3-1 (4-11, 13-11, 11-9, 13-11) से हराकर तीन मैच के मुकाबले में भारत को बराबरी दिलाई।
हालांकि अनुभवी जोशना चिनप्पा को दुनिया की 39वें नंबर की खिलाड़ी हो जे लोक के खिलाफ सीधे गेम में हार का सामना करना पड़ा जिससे भारत ने मुकाबला गंवा दिया।
जोशना ने कहा, ‘‘हां, निश्चित रूप से मैं काफी निराश हूं। हम मिश्रित युगल में भी जीत के बहुत करीब पहुंच गए थे। लेकिन हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और प्रयास के स्तर से मैं बेहद खुश हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘टीम स्पर्धा में भी हम उन्हें हराने के बेहद करीब थे लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है और यह मुश्किल होता है। फिर भी मुझे अपनी टीम पर बेहद गर्व है।’’
चालीस वर्षीय जोशना ने इन एशियाई खेलों में भारत की ओर से सबसे अधिक सत्र में हिस्सा लेने का रिकॉर्ड बनाया है। यहां दो पदक जीतने के बाद जोशना के एशियाई खेलों के पदकों की संख्या सात हो गई है। उन्होंने यहां वेलावन सेंथिलकुमार के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा का पदक भी जीता। जोशना ने 2002 से लगातार सात एशियाई खेलों में दो रजत और पांच कांस्य पदक जीते हैं।
अपने मुकाबले के बारे में जोशना ने कहा, ‘‘मुझे लगा कि मैं मुकाबले में थोड़ी देर से लय में आई और तब तक काफी देर हो चुकी थी। लेकिन अपनी प्रतिद्वंद्वी को पूरा श्रेय देती हूं। उसने शुरुआत से ही काफी आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन किया।’’
सिन युक चान के खिलाफ अनाहत ने शानदार शुरुआत की और पहले दो गेम जीत लिए। चौथे गेम में वह 10-6 से आगे थीं लेकिन चार मैच प्वाइंट गंवा बैठीं जिससे सिन को जोरदार वापसी का मौका मिल गया।
पांचवें गेम में अनाहत 7-9 से पिछड़ गईं लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर 9-9 कर दिया। इसके बाद सिन ने पहला मैच प्वाइंट हासिल किया। अनाहत ने बैकहैंड ड्रॉप के जरिए इसे बचाया लेकिन संयम बनाए रखने वाली सिन ने एक और मैच प्वाइंट हासिल किया और फिर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अनाहत ने बाद में कहा, ‘‘मैं 2-0 से आगे थी और मेरे पास जीतने का शानदार मौका था लेकिन मैं मैच को अपने पक्ष में खत्म नहीं कर सकी। बेशक, हर बार चीजें योजना के मुताबिक नहीं होतीं लेकिन तन्वी ने शानदार वापसी की और उस मुकाबले में मिली हार की भरपाई करते हुए एक बेहतरीन खिलाड़ी के खिलाफ जीत हासिल की।’’
यहां महिला एकल में जीते रजत पदक के साथ अनाहत के एशियाई खेलों के पदकों की संख्या चार हो गई है। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक जीते थे।
अनाहत ने कहा, ‘‘बेशक, मैं दोनों स्पर्धाओं में पदक जीतकर खुश हूं और मुझे दोनों में इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन मैं इस प्रतियोगिता से जितना संभव हो सके उतना सीखने की कोशिश करूंगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह काफी लंबे 14 दिन रहे जिसमें बहुत ज्यादा स्क्वाश खेलना पड़ा। इससे मैं बहुत कुछ सीख सकती हूं। मैं वापस जाकर इन सभी चीजों की समीक्षा करूंगी और उन पर विचार करूंगी। सत्र अभी शुरू ही हुआ है।’’
दूसरे मैच में तन्वी को का यी ली के खिलाफ शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ा और वह पहला गेम जल्दी हार गईं। दूसरे गेम में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते हुए रैलियों को लंबा खींचा और 10-9 पर गेम प्वाइंट हासिल किया। बैकहैंड ड्रॉप के जरिए ली ने स्कोर बराबर कर दिया।
तन्वी ने एक और गेम प्वाइंट गंवाया लेकिन तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर भारत को मुकाबले में बनाए रखा। तीसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी 3-7 से पिछड़ गई थीं लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर 9-9 कर दिया। इसके बाद गेम प्वाइंट हासिल कर तन्वी ने ली की एक और गलती का फायदा उठाते हुए गेम अपने नाम कर लिया।
चौथे गेम में तन्वी ने 4-1 की बढ़त बना ली। ली ने 9-7 से बढ़त हासिल कर ली लेकिन तन्वी ने लगातार दो अंक लेकर वापसी की। ली ने गेम प्वाइंट हासिल किया जिसे तन्वी ने बचा लिया और फिर खुद मैच प्वाइंट हासिल कर लिया। पहला मैच प्वाइंट गंवाने के बाद उन्होंने दूसरे मौके को भुनाया और भारत की उम्मीदें बरकरार रखीं।
निर्णायक एकल मुकाबले में जोशना का सामना हो से हुआ। भारतीय खिलाड़ी अपनी प्रतिद्वंद्वी की शारीरिक गति का सामना नहीं कर सकीं और पहले दो गेम गंवाने के बाद तीसरे गेम में छह मैच प्वाइंट से पिछड़ गईं।
हालांकि जोशना ने अंतिम क्षणों में वापसी करते हुए पांच मैच प्वाइंट बचाए लेकिन अंततः गेम गंवा दिया। वह केवल 21 मिनट चले मुकाबले में 4-11, 7-11, 9-11 से हार गईं।
पुरुष टीम के सेमीफाइनल में वीर चोटरानी ने संजय जीवा को 11-4, 11-8, 11-5 से हराकर भारत की उम्मीदों को बनाए रखा था लेकिन अभय सिंह और सेंथिलकुमार क्रमशः ऐन योव एनजी और अमीशनराज चंद्रन से हार गए।
अभय पुरुष एकल फाइनल में योव से हार गए थे, लेकिन वह इसका बदला झुकता नहीं कर पाए और उन्हें 8-11, 8-11, 8-11 से हार का सामना करना पड़ा।
सेंथिलकुमार का सामना अपने से कम रैंकिंग वाले खिलाड़ी के खिलाफ था लेकिन चंद्रन उनसे बेहतर साबित हुए। उन्होंने सेंथिलकुमार को 10-12, 11-6, 11-8, 11-9 से हराकर मलेशिया को फाइनल में पहुंचाया जहां उसका सामना पाकिस्तान से होगा।
भाषा सुधीर पंत नमिता
नमिता
लेखक के बारे में
Web Title: भारत की पुरुष और महिला स्क्वाश टीम को कांस्य पदक
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