Upsc Shikha Gautam/Image Source: @hindipatrakar
Upsc Shikha Gautam: हाल ही में जारी हुए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों के बाद एक अजीब विवाद सामने आया है। इस मामले में दो अलग-अलग जगहों पर कुछ अभ्यर्थियों ने सफलता का दावा किया, जबकि बाद में वह दावा गलत साबित हुआ। इससे न केवल असली सफल अभ्यर्थियों के हक और सम्मान पर असर पड़ा, बल्कि मीडिया की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए।
Upsc Shikha Gautam: मामले का पहला हिस्सा बुलंदशहर की रहने वाली शिखा गौतम से जुड़ा है। उन्होंने यूपीएससी में सफलता और 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया। इस खबर के बाद उनके परिवार और शहर में जश्न मनाया गया। मीडिया में उनके कई इंटरव्यू हुए और उन्हें सफलता की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि उनके पिता एक इंटर कॉलेज में चपरासी हैं और परिवार ने गरीबी के बावजूद बेटी की सफलता पर गर्व जताया। हालांकि बाद में पता चला कि 113वीं रैंक हासिल करने वाली असली अभ्यर्थी हरियाणा के रोहतक की शिखा हैं, जो सतीश कुमार की बेटी हैं और वर्तमान में सम्पला क्षेत्र में ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर (BDPO) के पद पर कार्यरत हैं। जब उन्होंने मीडिया में बुलंदशहर की शिखा गौतम का दावा देखा तो उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने एडमिट कार्ड और परिणाम का मिलान किया और पूरे मामले की जानकारी यूपीएससी को ई-मेल के माध्यम से दी।
Upsc Shikha Gautam: बताया जा रहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों की जांच के दौरान बुलंदशहर की शिखा गौतम ने इस मामले में खेद जताते हुए स्वीकार किया कि उनसे गलती हुई है। इसी तरह का एक और मामला बिहार से सामने आया। यहां बिहार में आकांक्षा सिंह ने यूपीएससी परीक्षा पास करने का दावा किया था। वह रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया की पोती बताई जाती हैं। हालांकि बाद में पता चला कि असली सफल अभ्यर्थी ग़ाज़ीपुर की आकांक्षा सिंह हैं। इस विवाद के बाद यूपीएससी को भी इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। इन घटनाओं के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऐसे दावे जानबूझकर किए जाते हैं या फिर यह महज लापरवाही का मामला है। क्योंकि यूपीएससी के परिणाम में हर अभ्यर्थी अपने एडमिट कार्ड के रोल नंबर के आधार पर ही सूची में अपना स्थान देख सकता है, ऐसे में भ्रम की संभावना बेहद कम रहती है।