चेन्नई, आठ सितंबर (भाषा) तमिलनाडु में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को घरों में पाइप (नलों) से पेयजल उपलब्ध कराने के जल जीवन मिशन (जेजेएम) के लक्ष्य को पानी की भारी कमी और कनेक्शन लगाने में गंभीर अनियमितताओं से झटका लगा है। विधानसभा में मंगलवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
जेजेएम के क्रियान्वयन पर किए गए प्रदर्शन ऑडिट में राज्य सरकार के दावों और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु ने भले ही करीब 84 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराने का दावा किया है, लेकिन चयनित जिलों में 50 प्रतिशत लक्षित परिवारों को हर दिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी की निर्धारित न्यूनतम आपूर्ति नहीं मिल रही है।
कैग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 96 प्रतिशत नल कनेक्शन लाभार्थियों के घरों के अंदर लगाए जाने के बजाये मिशन के दिशा-निर्देशों के विपरीत बाहर लगाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चयनित जिलों में सर्वेक्षण किए जाने के बाद 2,69,645 एफएचटीसी में से 2,59,613 नल कनेक्शन घरों के अंदर लगाने के बजाय खुले स्थानों और गलियों में लगाए गए थे। यह जल जीवन मिशन के मूल दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है। इससे न केवल लोग सुविधाओं से वंचित रहते हैं, बल्कि ये ढांचे क्षति, चोरी और खराब रखरखाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
राज्य सरकार ने घरों के बाहर नल लगाने के लिए जगह की कमी और लाभार्थियों के अनुरोध का हवाला दिया था, लेकिन कैग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इससे बनाई गई परिसंपत्तियों की सुरक्षा और लंबे समय तक उपयोग पर असर पड़ता है।
रिपोर्ट में जल आपूर्ति की स्थिति को भी चिंताजनक बताया गया। कैग ने कहा कि कोयंबटूर जैसे जिलों में जहां सरकार ने 100 प्रतिशत एफएचटीसी कवरेज का दावा किया था, वहां भी केवल 8.67 प्रतिशत बस्तियों को ही निर्धारित मानक के अनुसार हर दिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी मिल रहा था।
भाषा यासिर अजय
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