6th Pay Commission DA Hike Order: बीजेपी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को दी बड़ी सौगात, महंगाई भत्ते में सीधे 5 प्रतिशत की वृद्धि करने का आदेश, 1 जनवरी से मिलेगा एरियर | Image: AI Generated
जयपुर: 6th Pay Commission DA Hike Order मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्णयानुसार पांचवें एवं छठे वेतनमान के अंतर्गत राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते एवं पेंशनरों की महंगाई राहत में 1 जनवरी, 2026 से क्रमशः 9 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत की वृद्धि के वित्त विभाग के प्रस्ताव का उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने अनुमोदन कर दिया है। इस निर्णय के बाद पांचवें वेतनमान में महंगाई भत्ता/महंगाई राहत 474 प्रतिशत से बढ़कर अब 483 प्रतिशत एवं छठे वेतनमान में 257 प्रतिशत से बढ़कर अब 262 प्रतिशत हो गया है।
6th Pay Commission DA Hike Order इस निर्णय से पांचवें एवं छठे वेतनमान के अन्तर्गत वेतन आहरित कर रहे राज्य कर्मचारियों/पेंशनर्स को बढ़ी हुई दर से महंगाई भत्ते/महंगाई राहत का भुगतान प्राप्त हो सकेगा। सम्बंधित राज्य कार्मिकों के 1 जनवरी, 2026 से 30 अप्रेल, 2026 तक की अवधि का महंगाई भत्ता उनके जीपीएफ/जीपीएफ-2004/जीपीएफ-एसएबी अकाउंट में जमा होगा। इस अवधि के बाद का महंगाई भत्ता वेतन में जुड़ कर आएगा। पेंशनर्स को 1 जनवरी, 2026 से बढ़ी हुई महंगाई राहत एरियर के रूप में नगद मिलेगा। उल्लेखनीय है कि सुशासन को समर्पित प्रदेश सरकार के ‘आपणो अग्रणी राजस्थान’ के विजन के अनुरूप प्रदेश के प्रत्येक वर्ग के सर्वांगीण उत्थान हेतु हमारी सरकार कटिबद्ध है।
8वें वेतन आयोग (CPC) के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है। आयोग ने सुझाव और मांग रखने की डेडलाइन बढ़ाकर 15 जून तक कर दी है। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्य कर्मचारियों को सैलरी, पेंशन और अलाउंस में संशोधन पर विचार करने के लिए एक्स्ट्रा समय मिल गया है।
यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब कर्मचारी यूनियनों और पॉलिसी मेकर्स के बीच लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा तेज हो गई है। नए नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग ने ऐलान किया है कि हितधारकों द्वारा अपने ज्ञापन और सिफारिशें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जून होगी। इससे पहले आयोग द्वारा दी गई समय सीमा को 31 मई तक बढ़ा दिया गया था और यह दूसरी बार है जब समय सीमा बढा़ई गई है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। परामर्श प्रक्रिया के दौरान फिजिकल डॉक्यूमेंट्स, ईमेल, हार्ड कॉपी और पीडीएफ लेटर स्वीकार नहीं की जाएंगी। इस विस्तार का मतलब आयोग द्वारा अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स ग्रुप, डिफेंस इम्प्लाई के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।