नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) ने वैश्विक स्तर का विस्तार हासिल किया है लेकिन डिजिटल पहुंच, पारस्परिक संचालन क्षमता एवं साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां अब भी चिंता का विषय हैं।
भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान (आईसीआरआईईआर) परिषद द्वारा ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एवं सार्वजनिक सेवा वितरण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा कि आबादी का बड़ा हिस्सा, खासकर बुजुर्ग, कमजोर संपर्क वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और कम साक्षरता या सीमित डिजिटल समझ रखने वालों को अब भी डिजिटल सेवाओं तक पहुंच कायम करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ डिजिटल अवसंरचना चाहे जितनी उन्नत हो, वह पूर्ण अर्थों में डिजिटल समावेशन के बराबर नहीं है। सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक डिजिटल माध्यम से आसानी से सेवाएं पहुंचाने के लिए अब भी प्रयास किए जा रहे हैं।’’
नागेश्वरन ने कहा कि डेटा साझा करने और डिजिटल अभिलेख के क्षेत्र में विधायी एवं संस्थागत ढांचा अभी विकसित हो रहा है। राज्यों के बीच डीपीआई की पारस्परिक संचालन क्षमता अब भी प्रगति पर है। केंद्र सरकार की प्रणालियां अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से एकीकृत हो रही हैं। हालांकि राज्यों के स्तर पर डिजिटल अवसंरचना की गुणवत्ता और पूर्णता में अब भी काफी अंतर है।’’
साइबर सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा कि खतरों की जटिलता लगातार बढ़ने के मद्देनजर इस क्षेत्र में निरंतर ध्यान देने की जरूरत है।
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