भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण सौदे 2016-17 से दोगुने, एक-तिहाई के अपेक्षित नतीजे नहीं: क्रिसिल

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भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण सौदे 2016-17 से दोगुने, एक-तिहाई के अपेक्षित नतीजे नहीं: क्रिसिल

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 08:05 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 08:05 PM IST

मुंबई, 26 अगस्त (भाषा) भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए अधिग्रहण सौदों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 के मुकाबले दोगुने से अधिक हो गई है, लेकिन करीब एक-तिहाई सौदे अपेक्षित परिणाम दे पाने में नाकाम रहे। क्रिसिल ने बुधवार को यह जानकारी दी।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के प्रबंध निदेशक सुबोध राय ने कहा कि भारतीय कंपनियां वृद्धि की रफ्तार तेज करने, अपनी बाजार पहुंच बढ़ाने और नई क्षमताएं हासिल करने समेत विभिन्न कारणों से अधिग्रहण सौदे करती हैं।

यह विश्लेषण रिपोर्ट 20 क्षेत्रों में 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाले 600 सौदों पर आधारित है। इसमें वित्तीय सेवाओं एवं ढांचागत क्षेत्रों के सौदों के साथ विदेशी कंपनियों के अधिग्रहण और निजी इक्विटी कोषों की अगुवाई वाले सौदों को शामिल नहीं किया गया है।

क्रिसिल ने कहा कि दवा एवं स्वास्थ्य सेवा, उद्यम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और उपभोक्ता कारोबार से जुड़ी कंपनियां प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और बौद्धिक संपदा से जुड़ी कमियां दूर करने के लिए अधिग्रहण कर रही हैं।

वहीं, सीमेंट और धातु जैसे क्षेत्रों में एकीकरण तथा नई परियोजनाएं तैयार करने में लगने वाले समय को चार-छह साल से घटाकर एक-तीन साल करने जैसे कारण प्रमुख हैं।

राय ने कहा कि क्रिसिल ने अधिग्रहण सौदों का उनके नतीजों के आधार पर भी आकलन किया। कर्ज से वित्तपोषित 100 बड़े सौदों की समीक्षा में करीब दो-तिहाई सौदे ही मोटे तौर पर उसकी उम्मीदों पर खरे उतरे।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिग्रहण के बाद कंपनियों के सामने एकीकरण की चुनौती सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा कंपनियों के सामने नियामकीय देरी और सीमा-पार सौदों के क्रियान्वयन से जुड़ी दिक्कतें भी आती हैं।

क्रिसिल के उप मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता ने कहा कि अधिग्रहण से अधिकांश मामलों में कंपनियों की साख पर स्थिर या सकारात्मक असर पड़ा है। करीब तीन-चौथाई कंपनियों की रेटिंग अधिग्रहण के बाद बरकरार रही या उनमें सुधार हुआ।

उन्होंने कहा कि अधिग्रहण करने वाली करीब 60 प्रतिशत कंपनियों ने दो साल के भीतर तय योजना के अनुरूप या उससे पहले ही अपना कर्ज घटा दिया।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय