नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) सरकार ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को बिजली क्षेत्र के उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था की निगरानी में महत्वपूर्ण एससीएडीए प्रणालियों के स्वदेशीकरण की रूपरेखा तैयार करने को कहा है, ताकि 2030 तक इनके आयात को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा सके।
सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण बिजली ढांचे के लिए विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता से आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर जोखिम को देखते हुए उठाया गया है।
एससीएडीए यानी ‘पर्यवेक्षी नियंत्रण और आंकड़ा अधिग्रहण (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) प्रणाली बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण में बिजली व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है। यह किसी विशेष उपकरण को नियंत्रित करने और दिए गए निर्देश के अनुसार उसके प्रदर्शन की पुष्टि करने में सक्षम होती है।
सीईए ने 25 अगस्त की एक रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में मौजूदा समय में आयात की जा रही एससीएडीए प्रणालियों के स्वदेशीकरण को बिजली व्यवस्था में आत्मनिर्भरता और साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में चिन्हित किया गया था।
विद्युत मंत्रालय ने 12 दिसंबर, 2025 को बताया था कि बिजली सचिव ने फैसला किया है कि 2030 के बाद एससीएडीए प्रणाली का आयात नहीं किया जाएगा और इसके स्वदेशीकरण के प्रयास शुरू किए जाने चाहिए।
सीईए ने कहा कि विद्युत प्रणालियों में तेजी से बदलाव के कारण एससीएडीए प्रणालियों को समय-समय पर उन्नत करने की जरूरत पड़ती है। पुराने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, कलपुर्जों की कमी तथा बेहतर दृश्यांकन, डेटा भंडारण, विश्लेषण और साइबर सुरक्षा की बढ़ती जरूरत इसके प्रमुख कारण हैं।
राष्ट्रीय बिजली नीति से जुड़े मामलों में केंद्र को सलाह देने वाले सीईए ने कहा कि एससीएडीए प्रणाली राष्ट्रीय बिजली ग्रिड के ‘केंद्रीय तंत्रिका तंत्र’ की तरह काम करती हैं। ये वास्तविक समय में निगरानी और नियंत्रण के जरिये ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति’ व्यवस्था को सक्षम बनाती हैं।
प्राधिकरण ने कहा कि प्रौद्योगिकी से संबंधित विदेशी मूल उपकरण विनिर्माताओं पर अत्यधिक निर्भरता से विभिन्न प्रणालियों के बीच तालमेल में दिक्कत, बदलाव करने में देरी, प्रणालियों में सुधार की सीमित गुंजाइश और बाहरी तकनीकी सहायता पर निर्भरता जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
सीईए ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में महत्वपूर्ण बिजली ढांचे के लिए विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, प्रौद्योगिकी तक पहुंच में दिक्कत, उन्नयन और तकनीकी सहायता मिलने में देरी तथा स्वामित्व वाली या ‘ब्लैक बॉक्स’ प्रणालियों में पारदर्शिता की कमी का खतरा रहता है।
भाषा योगेश रमण
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