Adani US SEC Fraud Case: अडानी पर अमेरिका में SEC धोखाधड़ी का केस.. कोर्ट से की मामले को ख़ारिज करने की अपील, जानें क्या दी दलीलें

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Adani US SEC Fraud Case: अडानी ने US SEC धोखाधड़ी केस खारिज करने की मांग की, अधिकार क्षेत्र और बॉन्ड बिक्री पर दी अहम दलीलें।

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 09:36 AM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 10:14 AM IST

Adani US SEC Fraud Case || Image- The Financial Express file

HIGHLIGHTS
  • अडानी ने US कोर्ट में की केस खारिज करने की मांग
  • SEC के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
  • बॉन्ड बिक्री में धोखाधड़ी से इनकार

न्यूयॉर्क: अरबपति कारोबारी गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने US कोर्ट से US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा दायर सिक्योरिटीज धोखाधड़ी के केस को खारिज करने की अपील की है। (Adani US SEC Fraud Case) उन्होंने दलील दी है कि यह केस US के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसमें किसी भी तरह की गलत हरकत साबित नहीं होती है।

केस को खारिज करने की मांग वाली 30 अप्रैल की प्रस्तावित अर्जी से पहले दायर एक प्री-मोशन लेटर में, अडानी परिवार ने अपने वकीलों के ज़रिए कहा कि ग्रुप की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) द्वारा 2021 में किए गए बॉन्ड बिक्री को लेकर SEC के दावे कई आधारों पर कानूनी रूप से गलत हैं।

जानें क्या है धोखाधड़ी का मामला

SEC ने नवंबर 2024 में अडानी परिवार पर केस किया था। आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों से जुड़ी कथित रिश्वतखोरी की योजना का खुलासा न करके निवेशकों को गुमराह किया। यह केस US सिक्योरिटीज कानूनों के तहत दायर किया गया था। अडानी परिवार ने दलील दी कि कोर्ट के पास इस मामले में व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि न तो उनका US से कोई खास संपर्क था और न ही बॉन्ड बिक्री में उनकी कोई सीधी भागीदारी थी।

उन्होंने बताया कि 750 मिलियन डॉलर की बॉन्ड बिक्री US के बाहर, नियम 144A और रेगुलेशन S के तहत मिली छूट के आधार पर की गई थी। इसमें सिक्योरिटीज US से बाहर के अंडरराइटरों को बेची गई थीं, जिन्हें बाद में कुछ हद तक योग्य संस्थागत खरीदारों को दोबारा बेचा गया था। (Adani US SEC Fraud Case) वकीलों ने आगे कहा कि शिकायत में यह आरोप नहीं लगाया गया है कि गौतम अडानी ने बॉन्ड जारी करने को मंज़ूरी दी थी, अहम बैठकों में हिस्सा लिया था, या US निवेशकों से जुड़ी किसी भी गतिविधि को निर्देशित किया था।

‘SEC का केस US के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला’

दायर अर्जी में यह भी कहा गया है कि SEC का केस US के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। इसमें बताया गया है कि सिक्योरिटीज US में लिस्टेड नहीं थीं, इन्हें जारी करने वाली कंपनी भारतीय है, और कथित गलत हरकत पूरी तरह से भारत में हुई थी।

US सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए, बचाव पक्ष ने कहा कि SEC यह साबित करने में नाकाम रहा है कि यह कोई “घरेलू लेन-देन” था, जो कि US सिक्योरिटीज कानूनों को लागू करने के लिए एक ज़रूरी शर्त है। उन्होंने आगे कहा कि SEC ने निवेशकों को किसी भी तरह के नुकसान का आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने बताया कि बॉन्ड की अवधि पूरी हो चुकी है और 2024 में उनका पूरा भुगतान, ब्याज सहित, कर दिया गया था।

“बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे”

उन्होंने रिश्वतखोरी के मूल आरोपों को भी गलत बताया और कहा कि इन दावों को साबित करने वाला कोई भी विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं है। (Adani US SEC Fraud Case) इस फ़ाइलिंग में यह तर्क दिया गया है कि SEC द्वारा बताए गए बयान जो ESG प्रतिबद्धताओं, भ्रष्टाचार-रोधी तरीकों और कंपनी की साख से जुड़े हैं असल में ऐसे “बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे” (puffery) हैं जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती; या फिर ये महज़ कंपनी को लेकर एक आम आशावाद है, जिस पर निवेशक उचित रूप से भरोसा नहीं कर सकते।

इसमें आगे यह भी कहा गया है कि SEC, किसी भी प्रतिवादी को किसी खास गुमराह करने वाले बयान से जोड़ने में नाकाम रहा है, और न ही वह धोखाधड़ी करने के इरादे को साबित कर पाया है। प्रतिवादी इस मामले को पूरी तरह से खारिज करने की मांग कर रहे हैं, और उन्होंने कहा है कि यदि ज़रूरत पड़ी, तो वे ‘प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस’ में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं।

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Q1. अडानी ने SEC केस खारिज करने की मांग क्यों की?

अडानी ने कहा मामला US अधिकार क्षेत्र से बाहर है और आरोप कानूनी रूप से गलत हैं।

Q2. SEC ने अडानी पर क्या आरोप लगाए हैं?

SEC ने निवेशकों को गुमराह करने और कथित रिश्वत योजना छिपाने का आरोप लगाया है।

Q3. अडानी की बॉन्ड बिक्री को लेकर क्या दलील है?

बॉन्ड बिक्री US के बाहर हुई, इसलिए अमेरिकी कानून लागू नहीं होते हैं।