एडीबी ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत किया
एडीबी ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत किया
नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में लगाए गए 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया।
एडीबी ने यह संशोधन पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के बावजूद पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन को देखते हुए किया है।
एडीबी ने अपनी ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक’ (एडीओ) सितंबर 2026 रिपोर्ट में कहा, “यह संशोधन भारत के उम्मीद से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत बढ़ा। इसमें मजबूत निवेश मांग, टिकाऊ उपभोग और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में ठोस वृद्धि का योगदान रहा।”
रिपोर्ट के अनुसार, अर्थव्यवस्था को उम्मीद से कम आपूर्ति संबंधी व्यवधानों, पूंजी के लगातार प्रवाह और बढ़ी हुई लागत का उपभोक्ता कीमतों पर सीमित असर पड़ने से भी लाभ हुआ। इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने में मदद मिली।
एडीबी के ताजा अनुमान में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जुलाई के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले 0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई है।
भारत के लिए एडीबी की कंट्री निदेशक मियो ओका ने कहा कि आपूर्ति संबंधी व्यवधानों और जिंसों की ऊंची कीमतों के बावजूद मजबूत बुनियादी ढांचा खर्च तथा वृद्धि को समर्थन देने वाली राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है।
उन्होंने कहा, “एआई से जुड़े निवेश समेत सेवा क्षेत्र में लगातार मजबूती, कृषि उत्पादकता में सुधार और विनिर्माण क्षेत्र की स्थिर वृद्धि से वृद्धि की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।”
एडीबी ने वित्त वर्ष 2027-28 में आर्थिक वृद्धि का अनुमान अब 7.1 प्रतिशत लगाया है, जो उसके पहले के 7.3 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा कम है। इसका मुख्य कारण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है।
रिपोर्ट में कहा गया कि ईंधन की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के अस्थायी प्रभाव से आगे घरेलू मांग वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में वृद्धि का मुख्य आधार बनी रहने की उम्मीद है। इसे मजबूत कर संग्रह, कम ब्याज दरों, घरेलू आय में वृद्धि तथा अगले वित्त वर्ष में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में संभावित संशोधन से समर्थन मिलेगा।
मुद्रास्फीति के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया कि हाल में इसमें लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इसकी वजह यह है कि मुद्रास्फीति में वृद्धि की गति पहले के अनुमान से अधिक धीमी रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 में मुद्रास्फीति घटकर चार प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो जुलाई के अनुमान के समान है। ऊर्जा की कीमतों में नरमी और सामान्य मानसून की स्थिति में कृषि आपूर्ति में सुधार से इसमें मदद मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया कि मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्धारित दायरे में रहने की उम्मीद है। हालांकि, महंगाई का दबाव बढ़ने पर केंद्रीय बैंक नीतिगत रेपो दर बढ़ाने पर विचार कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सार्वजनिक खर्च वृद्धि का प्रमुख आधार बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 29.9 प्रतिशत बढ़ा और इसके सालाना 11.5 प्रतिशत के लक्ष्य के अनुरूप रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया कि निजी निवेश में भी तेजी आने की उम्मीद है। सरकार द्वारा निवेश माहौल सुधारने के लिए किए जा रहे उपायों से निजी निवेश को समर्थन मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च और ईंधन करों में कटौती के बावजूद मजबूत प्रत्यक्ष कर राजस्व तथा तेल निर्यात कर और बहुमूल्य धातुओं पर शुल्क से अतिरिक्त प्राप्तियों के कारण राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 4.3 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है।
चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026-27 में जिंसों की ऊंची कीमतों के कारण बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027-28 में तेल की कम कीमतों और मजबूत निर्यात वृद्धि के कारण इसमें कमी आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 740.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। इसमें विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आरबीआई के उपायों से मदद मिली है।
रिपोर्ट में भविष्य की वृद्धि के लिए लंबे समय तक बने रहने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अल नीनो से जुड़े मौसम संबंधी व्यवधानों को प्रमुख जोखिम बताया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में सेवा तथा निर्माण क्षेत्रों के मजबूत बने रहने की संभावना है।
भाषा योगेश मनीषा
मनीषा

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