‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ विवाद विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक बोझ डालते हैं: सीतारमण

'ट्रांसफर प्राइसिंग' विवाद विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक बोझ डालते हैं: सीतारमण

‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ विवाद विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक बोझ डालते हैं: सीतारमण
Modified Date: September 23, 2026 / 12:43 pm IST
Published Date: September 23, 2026 12:43 pm IST

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि कंपनियों और उनकी अनुषंगी इकाइयों के बीच लेनदेन (ट्रांसफर प्राइसिंग) से जुड़े विवाद विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक बोझ डालते हैं। भारत ने कराधान से जुड़े दो नए ब्रिक्स कार्य समूह गठित करने की पैरवी की है।

ब्रिक्स देशों के कर प्रमुखों और कर विशेषज्ञों की बैठक को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि बैठक में दो नए कार्य समूहों के कार्यक्षेत्र संबंधी दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा। ये कार्य समूह अंतरराष्ट्रीय कराधान एवं हस्तांतरण मूल्य निर्धारण तथा राजस्व सांख्यिकी से संबंधित होंगे।

सीतारमण ने कहा, “हस्तांतरण मूल्य निर्धारण से जुड़े विवाद विकासशील देशों के प्रशासन पर असमान रूप से अधिक बोझ डालते हैं। ऐसे राजस्व ढांचे, जो हमारी राजकोषीय वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं हैं, हमारे बारे में दूसरों की धारणा और हमारी खुद की समझ को विकृत करते हैं। ये कार्य समूह इसलिए हैं क्योंकि इस कक्ष में मौजूद हर देश ने इन समस्याओं का अनुभव किया है।”

उन्होंने कहा कि ये कार्य समूह समय के साथ प्रगति के लिए स्थायी संस्थागत व्यवस्था तैयार करेंगे, चाहे ब्रिक्स की अध्यक्षता किसी के पास भी हो।

सीतारमण ने कहा, “यह व्यवस्था भारत की अध्यक्षता के बाद भी बनी रहेगी।‘‘

चीन 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।

मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान के नियमों पर कई बहुपक्षीय कर वार्ताओं के जरिये फिर से बातचीत हो रही है। इनमें अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय भी शामिल है, जिस पर सक्रिय रूप से बातचीत चल रही है।

सीतारमण ने कहा, “अगले कुछ वर्षों में इन प्रक्रियाओं के तहत लिए जाने वाले फैसले एक पीढ़ी तक सीमा-पार कराधान को प्रभावित करेंगे। ब्रिक्स देशों की इन वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका है। ये देश कर के स्रोत वाले क्षेत्राधिकार हैं और इनमें बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इनमें ऐसे देश भी हैं जिन्होंने सीमित आधार से अपनी घरेलू कर क्षमता को मजबूत किया है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कराधान के नियमों पर होने वाली इन वार्ताओं में ब्रिक्स देशों का दृष्टिकोण उनकी निष्पक्षता और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता केवल आज के फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पिछली उपलब्धियों के आधार पर भविष्य में नेतृत्व के लिए मजबूत नींव तैयार करना है।

सीतारमण ने इस वर्ष ब्रिक्स के कराधान संबंधी कार्यक्षेत्र के प्रमुख परिणामों को रेखांकित करते हुए कहा कि कर प्रशासन को अधिक सटीक बनाने और अधिकारियों के विवेकाधिकार को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही साझा प्रशासनिक मानकों और लोगों, विशेष रूप से युवाओं में निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी।

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि ब्रिक्स के कर विशेषज्ञों ने कार्य समूहों के काम के दायरे की समीक्षा करने में दो दिन बिताए हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान एवं ट्रांसफर प्राइसिंग कार्य समूह कर संधियों की व्याख्या, ट्रांसफर प्राइसिंग की जांच, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता (एपीए) और पारस्परिक समझौता प्रक्रिया (एमएपी) जैसी व्यवस्थाओं तथा अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय (यूएनएफसीआईटीसी) सहित बहुपक्षीय वार्ताओं में अनुभव साझा करने के लिए एक स्थायी ब्रिक्स मंच तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इन वार्ताओं में ब्रिक्स देशों की सामूहिक आवाज की जरूरत है, जो फिलहाल पर्याप्त मजबूत नहीं है।

श्रीवास्तव ने कहा कि राजस्व सांख्यिकी कार्य समूह राजकोषीय प्रदर्शन को मापने के लिए ऐसा ढांचा तैयार करेगा, जो ब्रिक्स देशों की वास्तविकताओं को दर्शाए, न कि बहुत अलग तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बनाए गए ढांचों की धारणाओं को अपनाए।

भाषा योगेश मनीषा

मनीषा


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