नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, देश का कृषि निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 2.8 प्रतिशत बढ़कर 52.55 अरब डॉलर रहा। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि निर्यात 51.12 अरब डॉलर था।
निर्यात में वृद्धि का कारण पारंपरिक ताकतों और उभरते उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों के संतुलित मिश्रण के साथ-साथ विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में लगातार जारी विविधीकरण है।
एक अधिकारी ने बताया कि कृषि और संबद्ध उत्पाद इस क्षेत्र को लगातार मजबूती प्रदान करते रहे, जबकि समुद्री और बागवानी उत्पादों के निर्यात ने इसे एक नई गति दी। यह बेहतर मूल्य प्राप्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हुई मांग को बताता है।
दलहन निर्यात 21.83 प्रतिशत बढ़कर 94.81 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। यह वैश्विक प्रोटीन आवश्यकताओं को पूरा करने में भारत की मजबूत होती स्थिति का संकेत है। पिछले वित्त वर्ष में, स्थिर मांग और बेहतर आपूर्ति श्रृंखलाओं के कारण ताजे फलों के निर्यात में 12.89 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1.32 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
आंकड़ों के अनुसार इसके अतिरिक्त, वनस्पति तेलों के निर्यात में 15.88 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 73.21 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अनाज से तैयार प्रसंस्कृत और मूल्य-वर्धित खाद्य उत्पाद 7.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.01 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया। यह उच्च-मूल्य वाले कृषि-निर्यात की ओर बढ़ते रुझान को बताता है।
आंकड़ों के अनुसार काजू के निर्यात में 12.21 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 37.95 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जबकि कोको उत्पादों का निर्यात 7.59 प्रतिशत बढ़कर 31.79 करोड़ डॉलर रहा। इसी तरह, अन्य तिलहनों ने 84.39 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की। यह विशिष्ट कृषि वस्तुओं में उभरते अवसरों की ओर संकेत देता है।
यहां तक कि गेहूं के निर्यात में भी तेज वृद्धि देखने को मिली। यह बढ़कर 1.03 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। यह चुनिंदा बाजारों में नई गति और मांग के पुनरुद्धार का संकेत है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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