वर्ष 2025-26 में एक लाख करोड़ रुपये के एमएसएमई कर्ज का एआई से आकलन कियाः एसबीआई
वर्ष 2025-26 में एक लाख करोड़ रुपये के एमएसएमई कर्ज का एआई से आकलन कियाः एसबीआई
मुंबई, 12 अगस्त (भाषा) देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल कर करीब एक लाख करोड़ रुपये के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) कर्ज का जोखिम आकलन किया है। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एसबीआई के प्रबंध निदेशक राम मोहन राव अमारा ने यहां वार्षिक ‘फाइबैक’ कार्यक्रम में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में 12 महीने के दौरान बैंक पांच करोड़ रुपये तक के ऋणों का जोखिम आकलन करने में सक्षम रहा। नए और मौजूदा दोनों ग्राहकों को मिलाकर करीब एक लाख करोड़ रुपये के ऋणों का आकलन किया गया।
उन्होंने कहा कि बैंक 10,000 रुपये तक के चेक के प्रसंस्करण को स्वचालित करने के लिए ‘विशाल भाषा मॉडल’ (एलएलएम) समेत एआई का भी इस्तेमाल कर रहा है। एलएलएम ऐसे एआई मॉडल हैं जो बड़ी मात्रा में आंकड़ों से सीखकर मानव भाषा को समझने और उसका विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं।
अमारा ने कहा कि एआई के इस्तेमाल से बैंक के ग्राहक संबंध प्रबंधकों का समय बचा है। पहले आंकड़े जुटाने और प्रारंभिक विश्लेषण में ही उनका काफी समय लग जाता था।
उन्होंने कहा कि बैंक में जमा होने वाले करीब 25 प्रतिशत चेक 10,000 रुपये तक की राशि वाले होते हैं। एआई मॉडल चेक को पढ़कर अनिवार्य विवरण और अनुपालन संबंधी जरूरतों की जांच कर सकता है।
एसबीआई ने अब ऐसे चेक का प्रसंस्करण सीधे प्रक्रिया के जरिये स्वचालित कर दिया है और इसमें मानवीय हस्तक्षेप लगभग नहीं होता है।
हालांकि, बैंक ने एक नियंत्रण व्यवस्था भी कायम रखी है। इसके तहत एक समर्पित नियंत्रण जोखिम इकाई एआई प्रणाली से संसाधित चेक के एक नमूने की समीक्षा करती है, ताकि गलतियों की पहचान की जा सके और यह तय किया जा सके कि मॉडल को आगे प्रशिक्षित करने की जरूरत है या नहीं।
उन्होंने कहा कि एसबीआई ग्राहक से जुड़े पूरे चक्र में एआई का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें ऋण आकलन, ऋण पोर्टफोलियो प्रबंधन, धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन और ग्राहक सेवा शामिल हैं।
बैंक एआई-आधारित शुरुआती चेतावनी संकेतों का भी इस्तेमाल कर रहा है। इसके जरिये क्षेत्र विशेष से जुड़ी, बाजार और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अन्य सूचनाओं का विश्लेषण कर उन ऋण खातों की पहचान की जाती है जिनमें भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है।
अमारा ने कहा कि एआई से लागत-आय अनुपात में आने वाली कमी का आकलन करने में अभी समय लगेगा। हालांकि, बैंक को ग्राहक संतुष्टि बढ़ने और कर्मचारियों के समय का बेहतर इस्तेमाल होने के रूप में इसके लाभ दिखाई दे रहे हैं।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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