एआई से उत्पन्न गलत सूचना लोकतंत्र के लिए खतरा : जितिन प्रसाद

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एआई से उत्पन्न गलत सूचना लोकतंत्र के लिए खतरा : जितिन प्रसाद

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 02:56 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 02:56 PM IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को एआई उपकरणों के इस्तेमाल में सतर्कता बरतने की अपील करते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिये तैयार की गई गलत सूचना में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर करने की ताकत है।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में एक सत्र के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री ने कहा कि एआई छात्रों और शिक्षकों के लिए सीखने की प्रक्रिया को काफी बेहतर बना सकता है, लेकिन इसे ऐसा ‘शॉर्टकट’ नहीं माना जाना चाहिए जिससे आलोचनात्मक सोच या जिज्ञासा कमजोर पड़े।

उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई शिक्षकों की जगह नहीं ले सकता और शिक्षा में इसके जोखिमों से सावधानीपूर्वक निपटना होगा।

मंत्री ने कहा, ‘‘अगर डिजिटल साक्षरता नहीं होगी, तो साइबर खतरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। साइबर सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है और ‘एआई डीपफेक’ के जरिये गलत सूचना फैलाई जाती है। भारत जैसा देश, जो वास्तव में लोकतांत्रिक है जहां केंद्रीय, राज्य या निगम स्तर पर साल भर चुनाव होते रहते हैं..अगर एआई के जरिये गलत सूचना फैलाई गई, तो यह लोकतंत्र को पटरी से उतार सकती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ यह लोगों की सोच को गलत दिशा में मोड़ सकती है और एक बार मतदान हो गया, तो वह बेहद नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि लोग झूठी जानकारी के आधार पर वोट दिया होगा। यह हमारे और सरकार के सामने भी एक बड़ी चुनौती है।’’

उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। सरकार नीतियां बनाएगी और नागरिकों की सुरक्षा तथा उनके भविष्य की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगी, लेकिन ‘‘ इसमें सबको योगदान देना होगा।’’

शिक्षा में एआई के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रसाद ने कहा कि इस प्रौद्योगिकी को सिर्फ स्कूली पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि व्यापक शिक्षा ढांचे में शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह केवल स्कूल का एक विषय न रह जाए। यह इससे कहीं अधिक है। हमें युवाओं को सक्षम बनाना होगा ताकि वे योगदान दे सकें। यह क्षमता निर्माण का सवाल है।’’

मंत्री ने कहा कि छात्रों को एआई को ‘शॉर्टकट’ के रूप में नहीं देखना चाहिए। साथ ही आगाह किया कि इससे जिज्ञासा, तर्कशील सोच और सीखने की प्रक्रिया कमजोर नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और घरेलू उद्योग को डेटा उपलब्ध कराया जाए ताकि वे लोगों की जिंदगी बदलने वाले मॉडल और समाधान विकसित कर सकें।

भाषा निहारिका अजय

अजय