मुंबई, 16 फरवरी (भाषा) घरेलू खुदरा बाजार वर्ष 2035 तक बढ़कर 210-215 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है, जो 2025 में अनुमानित 90-95 लाख करोड़ रुपये का दोगुने से भी अधिक होगा। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया।
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) ने संयुक्त रूप से यह रिपोर्ट ‘रिटेल लीडरशिप समिट 2026’ में जारी की।
रिपोर्ट कहती है कि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर होने से भारत खुदरा बाजार में वृद्धि का प्रमुख चालक रहेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, खुदरा क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि में वे कंपनियां आगे रहेंगी जो स्पष्ट रणनीतिक ध्यान, अनुशासित क्रियान्वयन और कृत्रिम मेधा (एआई) पर आधारित बदलाव को अपनाएंगी।
रिपोर्ट कहती है कि उपभोक्ता जुड़ाव, परिचालन मॉडल और प्रतिभा प्रबंधन में संरचनात्मक परिवर्तन अपनाने वाले खुदरा विक्रेता 200 लाख करोड़ रुपये के बाजार की यात्रा में असमानुपातिक मूल्य अर्जित कर सकेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्पष्ट प्राथमिकताएं तय करना और अनुशासित क्रियान्वयन, अलग पहचान वाली ग्राहक मूल्य पेशकश और लाभप्रद वृद्धि बनाए रखने के लिए जरूरी है। उपभोक्ताओं के निर्णय अब अधिक जटिल और संदर्भ-आधारित हो गए हैं जबकि खरीदारी की पूरी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी, खासकर एआई का प्रभाव बढ़ रहा है।
बीसीजी के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ साझेदार अभिक सिंघी ने कहा, “भारत का खुदरा क्षेत्र अगले दशक में करीब 200 लाख करोड़ रुपये के अवसर में बदलने के लिए तैयार है। भौतिक और ऑनलाइन दोनों बाजारों के परिचालन नकदी प्रवाह में स्पष्ट सुधार दिख रहा है। भविष्य के विजेता वे होंगे जिनकी स्पष्ट और अलग पहचान वाली रणनीति, बड़े पैमाने पर एआई एवं प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल और उत्कृष्ट क्रियान्वयन होगा।”
रिपोर्ट में कहा गया कि एआई-संचालित स्वचालित खरीदारी प्रणाली ‘एजेंटिक कॉमर्स’ अब प्रयोग के चरण से आगे बढ़कर वास्तविकता बन चुकी है। अमेरिका के शहरी उपभोक्ताओं में लगभग 42 प्रतिशत ने जनरेटिव एआई (जेनएआई) का उपयोग शोध और खरीद निर्णयों में किया है।
बीसीजी के प्रबंध निदेशक एवं साझेदार भारत मिमानी ने कहा कि भारत में डिजिटल को अपनाने की तेज रफ्तार को देखते हुए शहरी क्षेत्रों, विशेषकर जेन जेड उपभोक्ताओं के बीच एआई-आधारित खरीदारी तेजी से बढ़ेगी।
आरएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कुमार राजगोपालन ने कहा कि अगले दशक में वही कंपनियां सफल होंगी जो बदलाव को परियोजना नहीं बल्कि अनुशासित प्रक्रिया के रूप में अपनाएंगी और विभिन्न प्रारूप, चैनल और मूल्य स्तर पर निरंतर भरोसा कायम रखेंगी।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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