इंदौर (मध्यप्रदेश), 29 जून (भाषा) परिवहन उद्योग के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने वाहन ‘लोकेशन ट्रैकिंग’ उपकरणों (वीएलटीडी) की व्यवस्था की समीक्षा की मांग करते हुए सोमवार को कहा कि मौजूदा प्रणाली से ट्रांसपोर्टर पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने इंदौर में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हमने अपने वाहनों में जीपीएस उपकरण पहले से लगा रखे हैं। अब वीएलटीडी और पैनिक बटन जैसी अतिरिक्त व्यवस्थाएं अनिवार्य की जा रही हैं।’’
उन्होंने कहा कि वीएलटीडी की वर्तमान व्यवस्था को लेकर ट्रांसपोर्टर के बीच कई व्यावहारिक और आर्थिक चिंताएं हैं जिन पर सरकार को विचार करना चाहिए।
एआईएमटीसी अध्यक्ष ने दावा किया कि बाजार में अलग-अलग निजी एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे वीएलटीडी की कीमतों में काफी अंतर है और ट्रांसपोर्टर को ऐसे एक उपकरण के लिए 6,000 रुपये से 33,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
सभरवाल ने कहा कि सरकार को कुछ चुनिंदा एजेंसियों के माध्यम से वीएलटीडी लगाने की व्यवस्था करने के बजाय स्पष्ट और एकरूप नीति बनानी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वीएलटीडी जैसे उपकरण वाहन के विनिर्माण स्तर पर मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) द्वारा लगा दिए जाने चाहिए।
सभरवाल ने कहा कि वीएलटीडी लगवाने की तकनीकी जिम्मेदारी वाहन संचालकों पर डालना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमने तय किया है कि हम वीएलटीडी के मुद्दे पर सरकार से बात करेंगे और मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की मांग करेंगे।’’
एआईएमटीसी की रविवार को आयोजित प्रबंध समिति की बैठक में शामिल होने सभरवाल इंदौर आए थे।
उन्होंने बताया कि बैठक में वीएलटीडी के साथ ही ई-चालान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।
सभरवाल ने कहा कि ई-चालान प्रणाली के क्रियान्वयन की कथित विसंगतियों को लेकर ट्रांसपोर्टर में असंतोष है और उनका संगठन इस विषय में कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
राज्य सीमाओं पर जांच व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए सभरवाल ने कहा कि पारंपरिक चेकपोस्ट हटाए जाने के बावजूद सरकारी कर्मचारियों द्वारा विभिन्न स्थानों पर वाहनों की जांच की जा रही है, जबकि ऐसी अधिकांश जांच डिजिटल माध्यमों से संभव है।
उन्होंने बताया कि एआईएमटीसी की बैठक में डीजल और टोल टैक्स की दरों में वृद्धि से ट्रांसपोर्ट क्षेत्र की परिचालन लागत बढ़ने पर भी चिंता व्यक्त की गई।
सभरवाल ने कहा कि डीजल की महंगाई के मौजूदा दौर में सरकार को ट्रांसपोर्टर को टोल टैक्स में राहत देने जैसे उपायों पर विचार करना चाहिए।
इलेक्ट्रिक ट्रकों के संबंध में एआईएमटीसी अध्यक्ष ने कहा कि उनकी ऊंची कीमत तथा चार्जिंग अवसंरचना की कमी प्रमुख चुनौतियां हैं, हालांकि सरकार ने वित्तपोषण और कुछ कर संबंधी रियायतों पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
भाषा हर्ष वैभव निहारिका
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