कोलकाता। West Bengal UCC Bill:पश्चिम बंगाल में आज समान नागरिक संहिता (UCC) बिल विधानसभा में पेश होने जा रहा है। सीएम शुवेंदु (CM Suvendu Adhikari) अधिकारी के इस कदम के बाद राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार जैसे नियमों में बदलाव होगा और यह सबके लिए एक समान हो जाएंगे, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। आपको बता दें कि इससे पहले गुजरात, उत्तराखंड और असम में UCC लागू किया जा चूका है। वहीं आज पश्चिम बंगाल में भी यह नियम लागू होने जा रहा है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (West Bengal UCC Bill) कानून में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होती है। इसके तहत शादी, तलाक, बच्चे गोद लेना, संपत्ति का अधिकार, पारिवारिक अधिकार जैसे सभी नागरिक मामलों में समान अधिकार लागू होता है।
जानें यूसीसी बिल का उद्देश्य
West Bengal UCC Bill पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के आधार पर चल रहे कानूनों की जगह पर एक कानूनी व्यवस्था लागू होगी। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य शादी, तलाक और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से अलग एक समान अधिकार बनाना है।
यूसीसी लागू करने वाला बनेगा चौथा प्रदेश
West Bengal UCC Bill आपको बता दें कि, गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल भारत में यूसीसी विधेयक लागू करने वाला चौथा राज्य बनेगा। उत्तराखंड ने सबसे पहले यह बिल लागू किया था।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) ऐसा कानून है, जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी नियम लागू होते हैं।
क्या पश्चिम बंगाल में आज से UCC लागू हो जाएगा?
नहीं। फिलहाल विधेयक विधानसभा में पेश किया जा रहा है। इसके लागू होने से पहले इसे विधानसभा से पारित होना, राज्यपाल की मंजूरी मिलना और अधिसूचना जारी होना आवश्यक है।
UCC लागू होने पर किन मामलों में बदलाव हो सकता है?
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी ढांचा लागू हो सकता है।
UCC लागू करने वाले राज्यों में किनका नाम शामिल है?
आपकी दी गई जानकारी और मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात, उत्तराखंड और असम के बाद पश्चिम बंगाल भी UCC विधेयक लाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
क्या UCC पर सभी दलों की एक राय है?
नहीं। UCC एक राजनीतिक और कानूनी रूप से बहस का विषय है। इसके समर्थन और विरोध में अलग-अलग दलों और संगठनों के अलग-अलग तर्क हैं।