नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि एयर इंडिया का बदलाव एक पांच से 10 साल की लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख कलपुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला में वर्षों से चली आ रही बाधाओं, पुरानी प्रणाली में बदलाव, कार्य संस्कृति और बेड़े के आधुनिकीकरण तथा बड़ी संख्या में प्रशिक्षित विमानन पेशेवर तैयार करने की जरूरत को देखते हुए इस परिवर्तन में समय लगेगा।
टाटा संस की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को लिखे पत्र में चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया के कायाकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘इतिहास की हर बड़ी एयरलाइन को खड़ा होने में दशकों का समय लगा है, कुछ तिमाहियों में नहीं यह नहीं होता।’’
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 एयर इंडिया के लिए कई बाहरी चुनौतियों वाला वर्ष रहा।
चंद्रशेखरन ने टाटा संस की 2025-26 की सालाना रिपार्ट में अपने पत्र में कहा, ‘‘हवाई क्षेत्र का बंद होना, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ईंधन कीमतों में वृद्धि और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव तथा एआई171 विमान दुर्घटना जैसी कई चुनौतियां रहीं। इन सभी परिस्थितियों में एयर इंडिया की टीम ने मजबूती के साथ काम किया।’’
टाटा समूह ने सरकार से घाटे में चल रही एयर इंडिया का नियंत्रण जनवरी, 2022 में संभाला था और इसके बाद कंपनी ने बड़े स्तर पर बदलाव योजना शुरू की। एयर इंडिया समूह की कंपनियों में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस हैं।
सिंगापुर एयरलाइंस की एयर इंडिया समूह में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
चंद्रशेखरन ने भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि वर्ष 2047, यानी भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने पर, एक युवा भारतीय एयर इंडिया के ऐसे विमान में यात्रा करेगा, जो भारतीय कलपुर्जों से बना होगा, जिसमें भारतीय जमीन पर विनिर्मित चिप होंगे और जिसकी सुरक्षा भारतीय रक्षा प्रणालियों से होगी।
उन्होंने कहा कि यही संस्थान निर्माण का उद्देश्य है। जब यह सफल होता है तो यह राष्ट्रीय जीवन के सामान्य बुनियादी ढांचे का हिस्सा बन जाता है।
चंद्रशेखरन ने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत को एक विश्वस्तरीय राष्ट्रीय विमान सेवा की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि घरेलू मार्गों पर चलने वाले एयर इंडिया के ‘नैरो-बॉडी यानी छोटे विमानों का नवीनीकरण किया जा चुका है और ग्राहकों से इस पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। वहीं, ‘वाइड-बॉडी’ यानी चौड़े विमानों का नवीनीकरण वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।
चंद्रशेखरन ने कहा, ‘‘टाटा समूह का लक्ष्य एयर इंडिया को ऐसा विमानन ब्रांड बनाना है जो भारत को दुनिया से जोड़े, विमानन, पर्यटन और लॉजिस्टिक क्षेत्र में लाखों रोजगार पैदा करे और भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाए….।’’
हालांकि, वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर एयर इंडिया को अभी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का राजस्व घटकर 71,870 करोड़ रुपये रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 78,636 करोड़ रुपये था।
वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का घाटा शुद्ध रूप से 15,367.75 करोड़ रुपये रहा, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस का घाटा 6,767.29 करोड़ रुपये रहा।
भाषा रमण अजय
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