सीएएस को बदनाम करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा : सेबी प्रमुख

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सीएएस को बदनाम करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा : सेबी प्रमुख

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  • Publish Date - August 19, 2026 / 01:35 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 01:35 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

मुंबई, 19 अगस्त (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को आगाह किया कि समापन नीलामी सत्र (सीएएस) यानी बाजार बंद होने के बाद शेयर के अंतिम भाव तय करने की व्यवस्था को ‘‘बदनाम’’ करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ पूंजी बाजार नियामक सख्ती से कार्रवाई करेगा।

सीएएस को तीन अगस्त को लागू किए जाने के बाद बाजार भागीदारों की ओर से जताई गई विभिन्न चिंताओं के बीच पांडेय ने कहा कि सीएएस में हेरफेर पकड़ने की सेबी की क्षमता उस पुरानी मात्रा भारांश औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) प्रणाली की तुलना में अधिक है, जिसकी जगह इसे लागू किया गया है।

पांडेय ने यहां उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सीएएस में हेरफेर को अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ सकते हैं। सीएएस पारदर्शिता के लिए है। अगर किसी को लगता है कि वे नई प्रणाली को बदनाम करने के लिए सीएएस में हेरफेर करेंगे, तो वे मुसीबत में पड़ेंगे।’’

सेबी प्रमुख ने कहा कि सीएएस व्यवस्था में भागीदारी बढ़ रही है और उन्होंने विशेष रूप से म्यूचुअल फंड तथा अपने खाते से कारोबार करने वाले ट्रेडरों द्वारा इसे अपनाए जाने का उल्लेख किया।

पांडेय ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सीएएस में भागीदारी में सुधार हो रहा है और आगे भी इसमें सुधार होगा। हम भागीदारी में आ रही बाधाओं को देख रहे हैं।’’

सेबी के अनुसार, दुनिया के प्रमुख बाजारों में पिछले दो वर्षों तक सीएएस जैसी व्यवस्था अपनाई गई है।

सेबी ने बाजार में हेरफेर रोकने और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सीएएस शुरू किया है। इस व्यवस्था के तहत कारोबार समाप्त होने से पहले निर्धारित समयावधि में खरीद और बिक्री के ऑर्डर को तत्काल निष्पादित करने के बजाय एकत्र किया जाता है और नीलामी आधारित ऑर्डर मिलान प्रक्रिया के तहत उनको मिलाया जाता है।

इस व्यवस्था की शुरुआत के बाद कुछ समस्याएं सामने आई थीं, जिन्हें सेबी प्रमुख पहले ‘‘शुरुआती दिक्कतें’’ बता चुके हैं।

उन्होंने बाजार भागीदारों से नई व्यवस्था को समझने के लिए अधिक प्रयास करने और सीएएस को समर्थन देने वाली प्रौद्योगिकी प्रणालियों को अपनाने की भी अपील की थी।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा