अपीलीय न्यायाधिकरण ने केकेएसपुन इंडिया के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया को मंजूरी दी

अपीलीय न्यायाधिकरण ने केकेएसपुन इंडिया के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया को मंजूरी दी

अपीलीय न्यायाधिकरण ने केकेएसपुन इंडिया के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया को मंजूरी दी
Modified Date: July 17, 2026 / 07:34 pm IST
Published Date: July 17, 2026 7:34 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने दूरसंचार उत्पाद बनाने वाली कंपनी केकेएसपुन इंडिया के खिलाफ जारी दिवाला प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पहले के आदेश को बरकरार रखा है। एनसीएलटी ने 11 जुलाई, 2025 को वित्तीय ऋण के भुगतान में चूक पाए जाने के बाद कंपनी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया था।

एनसीएलटी का आदेश यस बैंक की उस याचिका पर आया था, जिसमें 60.94 करोड़ रुपये के ऋण भुगतान में चूक का दावा किया गया था। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भी 190 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था।

केकेएसपुन इंडिया के निलंबित निदेशक मंडल के निदेशक कविश गुप्ता ने एनसीएलटी के आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी।

उन्होंने चार अन्य संबंधित अपीलों के साथ यह अपील दाखिल की थी।

गुप्ता ने दलील दी थी कि एनसीएलटी ने उनका पक्ष रखने का अधिकार बंद कर दिया था और बिना प्रभावी सुनवाई के दो अप्रैल, 2025 को मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।

उन्होंने यह भी कहा था कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 के तहत समझौता योजना और ऋणदाताओं के समूह के साथ एकमुश्त निपटान पर बातचीत हो रही थी।

अपील में यह भी कहा गया था कि बैंकों ने समझौता वार्ता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं, जबकि शुरुआती आदेश पारित किए गए। हालांकि, एनसीएलएटी ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी के साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

एनसीएलएटी ने कहा कि कंपनी को अपना पक्ष रखने के कई अवसर दिए गए थे, लेकिन उसने उनका उपयोग नहीं किया।

आदेश सुरक्षित रखने से पहले कंपनी की लिखित दलीलों को भी रिकॉर्ड में लिया गया था।

एनसीएलएटी ने कहा, ‘हमें 11 जुलाई, 2025 को एनसीएलटी द्वारा दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 की धारा सात के तहत आवेदन स्वीकार करने वाले आदेश में कोई कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं मिली।’

न्यायमूर्ति एन. शेषासायी, न्यायमूर्ति अरुण बारोका और न्यायमूर्ति इंदेवर पांडे की पीठ ने कहा कि केकेएसपुन इंडिया के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू करना कानून के अनुरूप है।

यस बैंक और एसबीआई की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए कई अवसर दिए गए थे, लेकिन उसने उनका लाभ नहीं उठाया।

उन्होंने कहा कि कंपनी के ऋण खाते क्रमश: अगस्त 2022 में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बन गए थे। ये ऋण सुविधाएं 2016 और 2011 से दी गई थीं।

बैंकों ने यह भी कहा कि जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच कंपनी की ओर से किए गए कई एकमुश्त निपटान प्रस्ताव ऋण और भुगतान चूक को स्वीकार करने के समान हैं।

भाषा योगेश रमण

रमण


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