ईटानगर, 16 फरवरी (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को तवांग ज़िले से जैविक लाल चावल ‘रक्त’ पेश किया। उन्होंने इसे राज्य में पारंपरिक खेती की समझ, विरासत को बचाने और टिकाऊ खेती का प्रतीक बताया।
खांडू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश के तवांग से प्रीमियम जैविक देसी लाल चावल रक्त चावल को पेश किया गया है।’’ उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह पहल स्थानीय खेती के तरीकों को एक बड़े मंच पर लाती है।
इसके सांस्कृतिक और पोषण महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह उत्पाद सिर्फ़ खाने की चीज़ नहीं है, बल्कि राज्य की पहचान और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को दिखाता है।
इसकी शुरुआत और महत्व पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चावल का उत्पादन और विपणन ग्रेंगखर गांव के पेमा त्सेवांग की पहल, रक्त ऑर्गेनिक करती है।
खांडू ने कहा, ‘‘यह पहल हमारी पारंपरिक ऊंचाई वाली खेती की समझ को बड़े बाजार तक पहुंचाती है।’’
उन्होंने स्थानीय उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजी-रोटी के मौके पैदा करने की इसकी क्षमता की ओर इशारा किया।
इस पहल के बड़े महत्व के बारे में बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्पाद सिर्फ वाणिज्यिक सफलता से कहीं ज़्यादा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक खाद्य उत्पाद से कहीं ज़्यादा, पारंपरिक बीजों की किस्मों और हमारे लोगों की खेती की विरासत को बचाता है,’’ उन्होंने राज्य में देसी फसलों को बचाने और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया।
अधिकारियों ने कहा कि लाल चावल की खेती पारंपरिक रूप से तवांग की ऊंचाई वाली घाटियों में मोनपा समुदाय द्वारा ठंडे मौसम और पहाड़ी इलाकों के हिसाब से पुराने तरीकों का इस्तेमाल करके की जाती रही है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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