कृषि क्षेत्र में जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग के लिए संतुलित नियामकीय व्यवस्था जरूरी : आईसीएआर

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कृषि क्षेत्र में जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग के लिए संतुलित नियामकीय व्यवस्था जरूरी : आईसीएआर

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  • Publish Date - July 26, 2026 / 08:58 PM IST,
    Updated On - July 26, 2026 / 08:58 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एम.एल. जाट ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से कृषि क्षेत्र में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संतुलित नियामकीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है।

कृषि मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी बयान के अनुसार, कृषि विज्ञान के विकास के लिए न्यास (टीएएएस) ने आईसीएआर और ‘फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया’ (एफएसआईआई) के साथ मिलकर ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) और जीनोम-संपादित (जीई) फसल पौधों के विनियमनों और अनुमोदन में सुधार’ विषय पर एक उच्च स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया।

इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, नियामकों, उद्योग के दिग्गजों, अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित 80 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य भारत के कृषि जैव प्रौद्योगिकी विनियामक ढांचे को आधुनिक बनाने के तौर-तरीकों पर चर्चा करना था।

कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे जाट ने विज्ञान-आधारित और साक्ष्य-आधारित कृषि नवाचारों को आगे बढ़ाने के आईसीएआर के दृढ़ संकल्प को दोहराया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने वाली ऐसी संतुलित नियामकीय व्यवस्था की जरूरत है, जो खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा दे।

इस गोलमेज बैठक की सह-अध्यक्षता टीएएएस के चेयरमैन आर.एस. परोदा और रासी सीड्स के संस्थापक एवं चेयरमैन एम. रामासामी ने की।

भाषा योगेश यासिर

योगेश

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