बैंक वसूली प्रक्रिया में हासिल अचल संपत्ति मूल उधारकर्ता को वापस नहीं बेच सकतेः आरबीआई
बैंक वसूली प्रक्रिया में हासिल अचल संपत्ति मूल उधारकर्ता को वापस नहीं बेच सकतेः आरबीआई
मुंबई, 16 जुलाई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि बैंक वसूली प्रक्रिया के तहत किसी असाधारण स्थिति में हासिल अचल संपत्ति को मूल उधारकर्ता या उससे संबंधित पक्षों को वापस नहीं बेच सकते हैं।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में बैंकों से अपने नियमित ऋण कार्यों के बदले गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के स्वामित्व में आने की अपेक्षा नहीं की जाती है। हालांकि, कुछ विशेष मामलों में ऋण जब गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) में बदल जाता है और कानूनी या संविदात्मक उपाय अपनाए जाते हैं, तब बैंक गिरवी रखी गई अचल संपत्ति का स्वामित्व वसूली रणनीति के तहत ले सकते हैं।
आरबीआई ने इस तरह हासिल गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रबंधन को स्पष्ट करने के लिए सतर्कता संबंधी मानदंड जारी किए हैं। इसके तहत बैंक को ऐसी संपत्तियों का निपटान अपनी नीति में निर्धारित अवधि के भीतर करना होगा, जो अधिकतम सात वर्ष से अधिक नहीं होगी।
इसके साथ ही आरबीआई ने कहा कि बैंक को इन्हें यथाशीघ्र सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से बेचने का प्रयास करना चाहिए।
इससे पहले मई में आरबीआई ने इन नियमों का मसौदा जारी कर हितधारकों से सुझाव मांगे थे। एक सुझाव उधारकर्ताओं को अपनी संपत्ति वापस खरीदने की अनुमति देने को लेकर आया था।
रिजर्व बैंक ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि ऐसा होने पर नैतिक जोखिम पैदा हो सकता है और ऋण अनुशासन कमजोर पड़ सकता है, क्योंकि चूक करने वाले उधारकर्ताओं को संपत्ति वापस पाने का विशेष अवसर मिल जाएगा।
इन संपत्तियों के मूल्यांकन पर कहा गया है कि अधिग्रहण के समय बैंक को इस तरह की गैर-वित्तीय संपत्ति की कीमत अपने खातों में उस आधार पर दर्ज करना चाहिए, जो खत्म किए गए कर्ज की बही-खाते में दर्ज कीमत या फिर जल्दी बेचने पर मिलने वाली कीमत से कम हो।
इसके अलावा, यदि ऐसी परिसंपत्तियों का उपयोग बैंक स्वयं करता है, तो उपयोग में लाने की तारीख से उन्हें निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्ति की श्रेणी से हटाकर ‘स्थिर परिसंपत्ति’ या अन्य उपयुक्त लेखा शीर्ष के अंतर्गत दर्ज किया जाएगा।
आरबीआई की तरफ से जारी ये निर्देश एक अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होंगे।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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