चीन का उभार 1992 के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे नाटकीय घटनाः ईएसी-पीएम

चीन का उभार 1992 के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे नाटकीय घटनाः ईएसी-पीएम

चीन का उभार 1992 के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे नाटकीय घटनाः ईएसी-पीएम
Modified Date: July 16, 2026 / 07:29 pm IST
Published Date: July 16, 2026 7:29 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने एक कार्यपत्र में 1992 के बाद चीन के उभार को वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे नाटकीय घटना बताते हुए कहा है कि अब वह क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 20 प्रतिशत और वैश्विक निवेश का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा रखता है।

क्रय शक्ति समता (पीपीपी) ऐसी विनिमय दर होती है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के मूल्य स्तर के अंतर को खत्म कर विभिन्न मुद्राओं की क्रय क्षमता को समान बनाना है।

ईएसी-पीएम ने ‘पीपीपी के आधार पर विश्व (1992 के बाद के रुझान)’ शीर्षक कार्यपत्र में कहा है कि प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में कम होने के बावजूद वैश्विक आर्थिक प्रणाली में चीन की हिस्सेदारी का आकार उल्लेखनीय है।

हालांकि, वर्ष 2025 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 8.2 प्रतिशत और वैश्विक बचत एवं निवेश में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ भारत का उदय भी महत्वपूर्ण रहा है।

रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के हवाले से कहा गया है कि दशक के अंत तक भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़कर 9.7 प्रतिशत हो सकती है।

यह कार्यपत्र ईएसी-पीएम के सदस्य संजीव सान्याल, आकांक्षा अरोड़ा और पायल शर्मा ने तैयार किया है।

कार्यपत्र के अनुसार, चीन के बाद दूसरे स्थान पर होने के बावजूद अमेरिका अब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी बनाए हुए है। हालांकि, उसकी सापेक्ष प्रति व्यक्ति आय में गिरावट आई है, फिर भी यह वैश्विक औसत से तीन गुना से अधिक है। बचत और निवेश में उसकी हिस्सेदारी घटने के बावजूद काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

इस बीच, प्रमुख यूरोपीय देशों की हिस्सेदारी में चारों संकेतकों- जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय, बचत और निवेश में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद 2025 तक ये देश वैश्विक औसत की तुलना में अपेक्षाकृत समृद्ध बने हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1992 में अमेरिका लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। जापान 8.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर था, जिसके बाद जर्मनी (छह प्रतिशत) और रूस (4.9 प्रतिशत) थे। उस समय चीन की हिस्सेदारी मात्र चार प्रतिशत थी।

ईएसी-पीएम का कार्यपत्र कहता है कि तेज आर्थिक वृद्धि के दशकों के बाद चीन अमेरिका से आगे निकल गया है और अब वैश्विक जीडीपी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। हालांकि, अब भी अमेरिका की भागीदारी 14.6 प्रतिशत बनी हुई है।

क्रय शक्ति समता के आधार पर भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 8.5 प्रतिशत है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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