नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार ने निवेशकों की ठंडी प्रतिक्रिया और पात्र बोलीदाताओं की कमी के चलते महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के नौ ब्लॉक की नीलामी रद्द कर दी है। ये ब्लॉक महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की सातवें दौर की नीलामी के तहत पेश किए गए थे।
यह घटनाक्रम देश में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी (क्लीन-टेक) विनिर्माण को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की रणनीति के लिए झटका माना जा रहा है। साथ ही, यह दर्शाता है कि तकनीकी जटिलताओं, अधिक पूंजीगत लागत और नियामकीय अनिश्चितताओं के कारण निजी निवेशकों को ऐसे खनिज ब्लॉक के लिए आकर्षित करना अब भी चुनौती बना हुआ है।
सरकार इससे पहले भी महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉक की कई नीलामियां रद्द कर चुकी है। छठे दौर में 11, पांचवें में पांच, चौथे में 11, तीसरे में तीन, दूसरे में 14 और पहले दौर में 13 ब्लॉक की नीलामी निरस्त की गई थी।
खान मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि दो खनिज ब्लॉक के लिए कोई बोली प्राप्त नहीं होने के कारण उनकी नीलामी प्रक्रिया रद्द कर दी गई। इनमें मध्य प्रदेश का मझौली टाइटेनियम, वैनेडियम एवं एल्युमिनस लैटराइट ब्लॉक तथा राजस्थान का रैमब देगाना टंगस्टन, लिथियम एवं संबद्ध खनिज ब्लॉक शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि सात अन्य खनिज ब्लॉक की नीलामी इसलिए रद्द की गई क्योंकि उनके लिए तीन से कम तकनीकी रूप से पात्र बोलीदाता मिले। इनमें नवारा-नवाडीह ग्लॉकोनाइट ब्लॉक, टीपा ग्लॉकोनाइट ब्लॉक, शाहपुर ग्लॉकोनाइट ब्लॉक, सपनेरी वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट ब्लॉक, गुरुर ग्लॉकोनाइट ब्लॉक, कराहीभदार ग्लॉकोनाइट ब्लॉक और नरिंगपांगा (दक्षिण) ग्रेफाइट ब्लॉक शामिल हैं। ये ब्लॉक बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में स्थित हैं।
सरकार ने सातवें दौर की नीलामी के लिए 23 मार्च को निविदा के लिए नोटिस (एनआईटी) निकाला था, जिसके तहत महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के कुल 19 ब्लॉक पेश किए गए थे। नीलामी खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के प्रावधानों के तहत आयोजित की गई।
सातवें दौर में पहली बार गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना के महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों को नीलामी के लिए शामिल किया गया था। इसमें ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लॉकोनाइट, रॉक फॉस्फेट तथा अन्य संबद्ध खनिज शामिल थे, जिससे देश में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण का दायरा और विस्तृत हुआ।
भाषा अजय अजय
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