ई20 पेट्रोल सभी वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित, ऊर्जा सुरक्षा के लिए एथनॉल मिश्रण जरूरी: उद्योग

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ई20 पेट्रोल सभी वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित, ऊर्जा सुरक्षा के लिए एथनॉल मिश्रण जरूरी: उद्योग

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  • Publish Date - July 4, 2026 / 09:00 PM IST,
    Updated On - July 4, 2026 / 09:00 PM IST

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) उद्योग जगत के दिग्गजों ने शनिवार को 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) के इस्तेमाल को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि इस ईंधन का कड़ा वैज्ञानिक परीक्षण किया गया है, यह नए और पुराने दोनों तरह के वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, और कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) की पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2030 के लक्ष्य से पहले, दोपहिया और चौपहिया वाहनों पर व्यापक परीक्षण के बाद ई20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से देश भर में लागू किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘यह कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।’

उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि इंजन के प्रदर्शन पर बहुत मामूली असर पड़ सकता है, लेकिन यह ड्राइविंग की आदतों जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2018 में शुरू किए गए एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद विकसित किया गया था और तेल विपणन कंपनियां निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन कर रही हैं।

मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा कि वर्ष 2023 से पहले बने वाहनों के मालिकों को ई20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि 2023 से ही भारत में ई20 अनुकूल वाहनों को अनिवार्य किया गया है।

भारती ने कहा, ‘हमने 2023 से पहले चलने वाली ई10 कारों का ई20 ईंधन पर सभी पैमानों पर परीक्षण किया है और हमें चिंता जैसी कोई बात नहीं मिली है।’

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कार्यकारी उपाध्यक्ष विक्रम गुलाटी ने एथनॉल को एक उच्च प्रदर्शन वाला और स्वच्छ ईंधन बताया, जो तेल आयात पर निर्भरता घटाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है।

हाल के वैश्विक ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘दो-तीन महीने पहले जो हुआ, वह हमारी आंखें खोलने वाला था और इस बात का अहसास कराने के लिए काफी था कि आयातित ऊर्जा पर निर्भर रहने के कारण हम कितने संवेदनशील हैं।’

भाषा योगेश रमण

रमण