Good News for CG Farmers Today: छत्तीसगढ़ के किसानों के खाते में आएंगे प्रति एकड़ 15000 रुपए, अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए साय सरकार का बड़ा फैसला

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Good News for CG Farmers Today: छत्तीसगढ़ के किसानों के खाते में आएंगे प्रति एकड़ 15000 रुपए, अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए साय सरकार का बड़ा फैसला

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  • Publish Date - July 5, 2026 / 10:01 AM IST,
    Updated On - July 5, 2026 / 10:02 AM IST

Good News for CG Farmers Today: छत्तीसगढ़ के किसानों के खाते में आएंगे प्रति एकड़ 15000 रुपए, अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए साय सरकार का बड़ा फैसला / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ देने का फैसला
  • किसानों के बैंक खाते में सहायता राशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की जाएगी
  • कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप को मंजूरी

रायपुर: Good News for CG Farmers Today मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी दी है। योजना के तहत खरीफ सीजन में धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

किसानों के खाते में आएंगे 15000 रुपए

Good News for CG Farmers Today योजना के अंतर्गत अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, मक्का, कपास तथा कोदो, कुटकी और रागी जैसी मोटे अनाज की फसलों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य धान पर निर्भरता कम करना, दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा भूमि की उर्वरता में सुधार करना है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। साथ ही डिजिटल फसल सर्वेक्षण के माध्यम से यह सत्यापित किया जाएगा कि किसान ने धान के स्थान पर स्वीकृत वैकल्पिक फसल की ही खेती की है। विगत खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले और इस वर्ष वैकल्पिक फसल का चयन करने वाले पात्र किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में दी जाएगी।

धान नहीं बोने वाले किसानों को मिलेगा फायदा

वहीं जो किसान पहले से खरीफ सीजन में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी अथवा कपास की खेती कर रहे हैं, उन्हें पूर्ववत 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि मिलेगी। योजना का लाभ ट्रस्ट, निजी कंपनियों, शाला विकास समितियों तथा शासकीय संस्थानों सहित अन्य विधिक संस्थाओं को नहीं मिलेगा। कृषि विभाग ने बताया कि पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज (बी-1 एवं पी-2), डीबीटी से लिंक बैंक खाता तथा मोबाइल नंबर आवश्यक होगा। किसान अपनी फसल प्रविष्टि में संशोधन के लिए निकटतम प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा विकासखंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

धान्य के लिए 1,158 हेक्टेयर का लक्ष्य

जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के विपणन के लिए प्रधानमंत्री आशा योजना भी संचालित है। इसके तहत अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली एवं सोयाबीन की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले की 13 सहकारी समितियों के माध्यम से की जाएगी। शासन द्वारा अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,450 रुपये, उड़द 8,200 रुपये, मूंग 8,780 रुपये, मूंगफली 7,517 रुपये तथा सोयाबीन 5,708 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। विभाग के अनुसार जिले में इस खरीफ सीजन के लिए मक्का 18,200 हेक्टेयर, दलहन 15,270 हेक्टेयर, तिलहन 4,920 हेक्टेयर तथा लघु धान्य फसलों के लिए 1,158 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ कब मिलेंगे?

जो किसान पिछले खरीफ सीजन में धान की खेती करते थे और इस वर्ष धान की जगह सरकार द्वारा स्वीकृत वैकल्पिक फसलें लगाएंगे, उन्हें 15,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से मिलेगी।

कृषक उन्नति योजना में किन फसलों को शामिल किया गया है?

योजना में अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, मक्का, कपास, कोदो, कुटकी और रागी जैसी दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं अन्य वैकल्पिक फसलें शामिल हैं।

कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने के लिए क्या करना होगा?

किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। साथ ही डिजिटल फसल सर्वेक्षण के जरिए यह सत्यापित किया जाएगा कि उन्होंने धान के स्थान पर स्वीकृत वैकल्पिक फसल की खेती की है।

जो किसान पहले से दलहन या तिलहन की खेती कर रहे हैं, उन्हें कितनी सहायता मिलेगी?

ऐसे किसानों को पूर्व की तरह 10,000 रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि मिलती रहेगी।

कृषक उन्नति योजना के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

योजना के लिए आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज (बी-1 एवं पी-2), डीबीटी से लिंक बैंक खाता और मोबाइल नंबर आवश्यक हैं।