नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल ने संगठनों को ऐसे पुराने डेटा को भी फिर से उपयोग में लाने के लिए प्रेरित किया है, जिसे पहले निष्क्रिय या कम उपयोगी माना जाता था। आईडीसी की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।
रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल पुराने एक्स-रे और इमेजिंग रिकॉर्ड, दूरसंचार कंपनियां पुराने कॉल और उपयोग संबंधी रिकॉर्ड तथा सरकारी एजेंसियां दशकों पुराने दस्तावेजों को एआई से जुड़े कार्यों के लिए फिर से इस्तेमाल में ला रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह बदलाव केवल नियामकीय अनुपालन या रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि एआई के लिए डेटा की बढ़ती उपयोगिता के कारण हो रहा है।
अध्ययन में अमेरिका, सऊदी अरब, जर्मनी, भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में सूचना प्रौद्योगिकी तथा कारोबार से जुड़े 763 निर्णय लेने वालों से एआई को अपनाए जाने के कारण उद्यमों की डेटा रणनीति में आ रहे बदलावों के बारे में सवाल किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 75.9 प्रतिशत संगठनों ने कहा कि वे एआई से जुड़े कार्यों के लिए संग्रहित ‘कोल्ड-टियर’ डेटा की अधिक मात्रा को फिर से ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं। करीब एक-चौथाई प्रतिभागियों ने इस वृद्धि को महत्वपूर्ण बताया।
‘कोल्ड-टियर डेटा’ से आशय ऐसे डेटा से है जिसे संगठन संग्रहित करके रखते हैं, लेकिन जिसका इस्तेमाल बहुत कम होता है या लंबे समय तक उस तक पहुंच नहीं होती।
वितरण और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षेत्र के एक सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी निर्णयकर्ता ने कहा कि ग्राहक अब भविष्य में एआई से मूल्य हासिल करने की उम्मीद में पहले छोड़े जा चुके डेटा को भी संग्रहित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पुराने एक्स-रे, संग्रहित रिकॉर्ड और पुराने निगरानी फुटेज… किसी भी डेटा को कभी फेंकना नहीं चाहिए।’
भाषा योगेश पाण्डेय
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