नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने के लिए ब्रिक्स देशों में सहयोग जरूरी: उद्योग
नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने के लिए ब्रिक्स देशों में सहयोग जरूरी: उद्योग
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अत्याधुनिक ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और महत्वपूर्ण खनिजों तक समय पर पहुंच के लिए सहयोग जरूरी है। उद्योग संगठन आईईएसए ने मंगलवार को ब्रिक्स देशों से यह बात कही।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम में तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। इसमें ब्राजील, रूस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है।
बिजली मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्नत ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर और मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित कर भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को गति देना है।
एक बयान के अनुसार, आईईएसए ने ब्राजील, रूस और यूएई समेत ब्रिक्स देशों से ऊर्जा सहयोग और खनिज सुरक्षा मजबूत करने का आग्रह किया। संगठन ने भारत सरकार को भी इस संबंध में सुझाव दिए हैं।
भारत में स्वच्छ उद्योगों में निवेश की संभावित परियोजनाओं का आकार 433 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके साथ भारत स्वच्छ औद्योगिक विकास के दुनिया के तीन प्रमुख केंद्रों में शामिल हो गया है।
आईईएसए के अध्यक्ष देबमल्य सेन ने कहा, ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण बढ़ने के साथ ऊर्जा भंडारण अब बिजली ग्रिड में मजबूती के लिए जरूरी हो गया है।’’
सरकारी अधिकारी के अनुसार, भारत में ऊर्जा भंडारण की परियोजनाओं की पाइपलाइन 100 गीगावाट के पार पहुंच गई है, जिसमें करीब 10 गीगावाट क्षमता चालू हो चुकी है। हालांकि, देश खनिजों और प्रमुख कलपुर्जों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘पुनर्चक्रण और उन्नत रासायनिक प्रौद्योगिकियों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का दायरा बढ़ाना तथा स्थिर ऊर्जा भंडारण के लिए विशेष आवंटन करना एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए बेहद जरूरी है।’’
ब्राजील के खान एवं ऊर्जा मंत्रालय के बुनियादी ढांचा विश्लेषक जोस जीसस लीमा नेटो ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए पारंपरिक ऊर्जा प्रणालियों की तुलना में काफी अधिक खनिजों की आवश्यकता होती है।
संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचा मंत्रालय के ऊर्जा विशेषज्ञ शुवेंदु कुमार बोस ने कहा कि मुख्य चुनौती अब केवल नवीकरणीय ऊर्जा की अनिश्चितता से नहीं, बल्कि पारेषण की अर्थव्यवस्था से भी तेजी से जुड़ रही है।
आईईएसए ने ब्रिक्स देशों के बीच वितरित ऊर्जा भंडारण की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए परीक्षण रिपोर्ट की पारस्परिक मान्यता, माप संबंधी प्रक्रियाओं में एकरूपता और समन्वित प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की।
भाषा रमण अजय
अजय

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