गोदरेज इंडस्ट्रीज निजी ऋण क्षेत्र में उतरेगी, एआईएफ के जरिये 2,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

गोदरेज इंडस्ट्रीज निजी ऋण क्षेत्र में उतरेगी, एआईएफ के जरिये 2,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

गोदरेज इंडस्ट्रीज निजी ऋण क्षेत्र में उतरेगी, एआईएफ के जरिये 2,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
Modified Date: August 18, 2026 / 04:56 pm IST
Published Date: August 18, 2026 4:56 pm IST

मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह (जीआईजी) ने निजी ऋण क्षेत्र में उतरने की मंगलवार को घोषणा की। समूह ने अपने पहले वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के जरिये 2,000 करोड़ रुपये तक जुटाने का लक्ष्य रखा है।

पिरोजशा गोदरेज के समूह के चेयरपर्सन का पद संभालने के कुछ दिन बाद यह घोषणा की गई है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, गोदरेज एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) श्रेणी-2 एआईएफ के तहत यह राशि जुटाएगी।

यह एआईएफ क्षेत्र-विशेष पर निर्भर नहीं रहने वाला मंच होगा, जो स्थापित निजी मध्यम आकार की कंपनियों को प्रदर्शन आधारित ऋण रणनीति के तहत वित्त उपलब्ध कराएगा। इसके तहत वित्तपोषण ठोस गारंटी और व्यापक ऋण अनुबंध सुरक्षा के आधार पर होगा।

बयान में कहा गया कि इसका न्यूनतम 1,000 करोड़ रुपये जुटाने और कुल 2,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने का लक्ष्य है। इसके साथ अतिरिक्त राशि (ग्रीन शू) जुटाने का विकल्प भी होगा।

गौरतलब है कि जीआईजी अपनी अनुषंगी गोदरेज कैपिटल के जरिये पहले से ही ऋण और संपत्ति प्रबंधन क्षेत्र में मौजूद है।

निजी ऋण क्षेत्र में आमतौर पर ऐसी इकाइयों को अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरों पर ऋण दिया जाता है, जिनकों विशेष परिस्थितियों के कारण विनियमित बैंक या गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों से वित्तपोषण संभव नहीं होता। भारत में पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

गोदरेज कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और गोदरेज एएमसी के गैर-कार्यकारी निदेशक मनीष शाह ने निजी ऋण क्षेत्र में प्रवेश को कारोबार का ‘‘स्वाभाविक विस्तार’’ बताया।

उन्होंने कहा कि कंपनी अब परिसंपत्ति प्रबंधन कारोबार में अपनी क्षमताएं विकसित करने की दिशा में काम करेगी।

शाह ने कहा, ‘‘कई अच्छी तरह से संचालित मध्यम आकार के कारोबार को ऐसी पूंजी की जरूरत होती है जो पारंपरिक वित्तपोषण की तुलना में अधिक मजबूती प्रदान करे, लेकिन इसके लिए उन्हें इक्विटी में हिस्सेदारी कम करने की जरूरत न पड़े। हम भारतीय कारोबार की अपनी समझ को अनुशासित पूंजी के साथ जोड़कर इस जरूरत को पूरा करने का अवसर देखते हैं।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय


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