स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने के लिए ब्रिक्स देशों को बैंकिंग संबंध मजबूत करने चाहिए: विशेषज्ञ
स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने के लिए ब्रिक्स देशों को बैंकिंग संबंध मजबूत करने चाहिए: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स देश वित्तीय बाजारों को और विकसित करके, बैंकिंग संबंधों को मजबूत करके तथा जोखिम प्रबंधन के मजबूत तंत्र स्थापित करके स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ा सकते हैं और सीमा पार निवेश को सुगम बना सकते हैं। विशेषज्ञों ने शुक्रवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि तेज भुगतान मंचों को एक-दूसरे से जोड़ने और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं के बीच परस्पर संचालन की संभावनाएं तलाशने से सीमा पार लेनदेन तेज, सस्ता एवं अधिक सुरक्षित हो सकता है।
पेशेवर सेवा कंपनी डेलॉयट के भागीदार अनिल तलरेजा ने कहा, ‘‘इस लक्ष्य (स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को मजबूत करने और सीमा पार निवेश को सुगम बनाने) को हासिल करने का एक तरीका व्यापार एवं निवेश में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाना है। राष्ट्रीय मुद्राओं का अधिक इस्तेमाल इसमें मदद कर सकता है, बशर्ते इसके साथ वित्तीय बाजारों को और विकसित करना, बैंकिंग संबंधों को मजबूत करना तथा जोखिम प्रबंधन के मजबूत तंत्र स्थापित करना भी शामिल हो।’’
ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है। इसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब को शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसका सदस्य बना।
बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने।
तलरेजा ने साथ ही कहा कि सदस्य देशों को ऐसा व्यापार ढांचा तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए, जो कारोबार के लिए अनुकूल हो। इसके लिए मानकों में सामंजस्य, प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा नियामकीय पारदर्शिता बढ़ाने के जरिये गैर-शुल्क बाधाओं को कम किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्यात एवं प्रौद्योगिकी पर नियंत्रण का वैश्विक व्यापार प्रवाह पर बढ़ता असर देखते हुए व्यापार संबंधी नियमों में अधिक सहयोग, पारदर्शिता और विश्वसनीयता की जरूरत होगी। साथ ही, विविधतापूर्ण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिये महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, दुर्लभ खनिजों, उन्नत विनिर्माण उपकरणों और बिजली क्षेत्र के उपकरणों तक पहुंच मजबूत करने के प्रयास भी करने होंगे।’’
इन उपायों से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार मजबूत होगा, अनुपालन लागत घटेगी और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी।
उद्योग मंडल एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि ब्रिक्स आर्थिक सहयोग के लिए एक शक्तिशाली मंच के रूप में उभरा है।
मिंडा ने कहा, ‘‘अगले चरण में अधिक भरोसे, पारदर्शिता और कारोबार-से-कारोबार साझेदारियों के जरिये व्यापार और निवेश को और गहरा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत भागीदारी नए अवसर पैदा कर सकती है, मजबूती बढ़ा सकती है, आर्थिक विविधीकरण को गति दे सकती है और अधिक संतुलित तथा समावेशी नई विश्व आर्थिक व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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