दिवाला समाधान के दौरान खातों से रोक हटाने के एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ बीएसई की अपील खारिज

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दिवाला समाधान के दौरान खातों से रोक हटाने के एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ बीएसई की अपील खारिज

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  • Publish Date - March 29, 2026 / 12:21 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 12:21 PM IST

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने बीएसई की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें एक्सचेंज ने दिवाला समाधान और परिसमापन की प्रक्रिया के तहत आई कंपनियों के डीमैट खातों पर रोक हटाने के एनसीएलटी के अधिकार को चुनौती दी है।

एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 60 (5) के तहत दिवाला प्रक्रिया के तहत डीमैट खातों से रोक (फ्रीज) हटाने के आवेदन पर विचार करने का अधिकार है।

बीएसई की दो याचिकाओं को खारिज करते हुए एनसीएलएटी ने कहा, ‘‘…इस अधिकार क्षेत्र का सही इस्तेमाल करते हुए ये आदेश पास किए गए हैं।’’

बीएसई ने कहा था कि एनसीएलटी के पास आईबीसी की धारा 60 (5) के तहत उन मामलों पर फैसला करने का कोई अधिकार नहीं है, जो प्रतिभूति कानून ढांचे और सेबी परिपत्र के तहत आते हैं।

ये मामले दो कंपनियों – फ्यूचर कॉरपोरेट रिसोर्सेज और लिज ट्रेडर्स एंड एजेंट्स – से जुड़े हैं, जिनके डीमैट खाते बीएसई ने फ्रीज कर दिए थे, क्योंकि उन्होंने सालाना सूचीबद्धता शुल्क देने में चूक दी थी। सूचीबद्धता प्रतिबद्धता और खुलासा आवश्यकता (एलओडीआर) नियमन के गैर-अनुपालन और बकाया भुगतान में चूक के मामलों में इस तरह का कदम उठाया जाता है।

दोनों कॉरपोरेट देनदारों (कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया का सामना कर रही कंपनियां) के समाधान पेशेवर/परिसमापक ने एनसीएलटी से संपर्क किया क्योंकि बीएसई ने डीमैट खातों से रोक हटाने से इनकार कर दिया था। कॉरपोरेट देनदार उन खातों में शेयर बेचना चाहते थे। एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने 31 अक्टूबर, 2025 और 31 जुलाई, 2024 को समाधान पेशेवर की दो अपीलों पर दो अलग-अलग आदेश पारित करते हुए बीएसई को रोक हटाने का निर्देश दिया था।

इन आदेश को बाद में बीएसई ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी।

भाषा अजय अजय

अजय