बजट: सीआईआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण के लिए तेज, मांग-आधारित रणनीति सुझाई

बजट: सीआईआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण के लिए तेज, मांग-आधारित रणनीति सुझाई

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  • Publish Date - January 11, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - January 11, 2026 / 03:22 PM IST

नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) उद्योग जगत के संगठन सीआईआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के विनिवेश से मूल्यवर्धन करने के लिए एक त्वरित चार-सूत्रीय रणनीति का सुझाव दिया है, जिसमें निजीकरण के लिए इकाइयों के चयन में मांग-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया गया है।

सीआईआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट के लिए सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को निजीकरण के माध्यम से संसाधन जुटाने चाहिए। इसके लिए ऐसी रणनीति अपनाई जाए जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी से दक्षता बढ़े, नई प्रौद्योगिकी आए और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत हो। इससे पूंजीगत खर्च और विकास संबंधी जरूरी योजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, खासकर जब दुनिया की अर्थव्यवस्था अनिश्चितता से भरी है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने केंद्र से तीन साल की अवधि के लिए निजीकरण की योजना की घोषणा करने का आह्वान किया है, जिसमें यह बताया जाए कि इस अवधि के दौरान किन उद्यमों का निजीकरण किया जा सकता है।

इसमें तर्क दिया गया कि इस पारदर्शिता से निवेशकों की गहरी भागीदारी और अधिक यथार्थवादी मूल्यांकन और मूल्य निर्धारण को प्रोत्साहन मिलेगा, जो निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने में योगदान देगा।

सीआईआई ने कहा, ”सरकार चरणबद्ध तरीके से सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसई) में अपनी हिस्सेदारी को शुरू में 51 प्रतिशत तक कम कर सकती है, जिससे वह सबसे बड़ी एकल शेयरधारक बनी रहेगी और बाजार में महत्वपूर्ण मूल्य का प्रवाह होगा। समय के साथ, इस हिस्सेदारी को और कम करके 33 से 26 प्रतिशत के बीच लाया जा सकता है।”

सीआईआई के विश्लेषण के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के 78 सूचीबद्ध उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी को घटाकर 51 प्रतिशत करने से लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है।

भाषा

योगेश पाण्डेय

पाण्डेय