निजी पीएफ ट्रस्ट के लिए आयकर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाएगा बजट प्रस्तावः ईपीएफओ
निजी पीएफ ट्रस्ट के लिए आयकर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाएगा बजट प्रस्तावः ईपीएफओ
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) सेवानिवृत्ति कोष निकाय ईपीएफओ ने भविष्य निधि ट्रस्ट के लिए आयकर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में रखे गए प्रस्ताव का मंगलवार को स्वागत करते हुए कहा कि विभिन्न नियमों को एक-दूसरे के अनुरूप बनाने और तालमेल बिठाने से हितधारकों के हितों को मजबूती मिलेगी।
श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि बजट 2026-27 में मान्यता-प्राप्त भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े आयकर ढांचे को कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप कर दिया गया है।
बयान के मुताबिक, फिलहाल निजी पीएफ ट्रस्ट को आयकर अधिनियम और ईपीएफ अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट की पात्रता में अंतर है।
इसके अलावा, आयकर प्रावधानों और ईपीएफओ के तहत अधिसूचित निवेश के तरीके भी अलग हैं, जबकि नियोक्ता के अंशदान की सीमा दोनों कानूनों में समान नहीं है। इन भिन्नताओं से भ्रम की स्थिति पैदा होती है और अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ती है।
मान्यता-प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट का नियमन आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची-11 के तहत होता है।
नए प्रावधानों के तहत आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत पीएफ की मान्यता केवल उन्हीं ट्रस्ट को मिलेगी जिन्हें ईपीएफ अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत छूट मिली हुई है।
धारा 17 के तहत नियोक्ता अपने कर्मचारियों के पीएफ खातों के प्रबंधन और मासिक ईपीएफ रिटर्न दाखिल करने से छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने निवेश के मोर्चे पर कहा कि निवेश मानदंड अभी मौजूदा ईपीएफ ढांचे और अधीनस्थ विधानों के तहत ही नियंत्रित रहेंगे। साथ ही, सरकारी प्रतिभूतियों में 50 प्रतिशत निवेश की अनिवार्य सीमा को हटा दिया गया है।
नियोक्ता के अंशदान के संबंध में कहा गया कि अब यह 7.5 लाख रुपये प्रति वर्ष की मौद्रिक सीमा के अधीन होगा। इस सीमा से अधिक अंशदान पर परिलाभ के रूप में कर लगाया जाएगा।
ईपीएफओ ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में आयकर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाना हितधारकों के हितों को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे स्पष्ट हो गया है कि अब ईपीएफ से जुड़ी छूट कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 से ही नियमित होगी।
साथ ही, निवेश मानदंडों और नियोक्ता अंशदान की सीमाओं को भी आयकर अधिनियम के अनुरूप कर दिया गया है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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