मंत्रिमंडल ने तीसरे चरण की हरित ऊर्जा गलियारा योजना को दी मंजूरी, 1.86 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च

मंत्रिमंडल ने तीसरे चरण की हरित ऊर्जा गलियारा योजना को दी मंजूरी, 1.86 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च

मंत्रिमंडल ने तीसरे चरण की हरित ऊर्जा गलियारा योजना को दी मंजूरी, 1.86 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च
Modified Date: September 30, 2026 / 04:13 pm IST
Published Date: September 30, 2026 4:13 pm IST

नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को तीसरे चरण की हरित ऊर्जा गलियारा योजना को मंजूरी दे दी। इस पर कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।

आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरित ऊर्जा गलियारा चरण-III (जीईसी-III) योजना को मंजूरी दी।

इस पहल के तहत भारत की राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली (आईएनएसटीएस) को मजबूत किया जाएगा, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को उत्पादन संयंत्र से उपभोक्ताओं तक पहुंचाना संभव हो सकेगा।

आधिकारिक बयान के अनुसार, योजना के तहत नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता, अधिक मांग वाले समय में बिजली कटौती तथा गैर-सौर घंटों में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए 50 गीगावाट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी लगाई जाएगी।

यह योजना भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने और उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने में मदद करेगी।

योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए कुल 1,86,405 करोड़ रुपये का व्यय रखा गया है। इसमें राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के लिए 50,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

इस योजना के तहत केंद्र सरकार 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी। इससे राज्य के भीतर पारेषण शुल्क का बोझ कम करने और बिजली की लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी, जिसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को मिलेगा।

योजना के तहत पारेषण प्रणाली से जुड़ी सभी नई परियोजनाओं को शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये लागू किया जाएगा। मौजूदा परियोजनाओं को आधुनिक बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के काम लागत-आधारित व्यवस्था के तहत किए जाएंगे।

राज्य पारेषण इकाइयां योजना की समग्र क्रियान्वयन एजेंसी होंगी। पारेषण सेवा प्रदाता नई परियोजनाओं में बनाओ, अपनाओ, संचालन और रखरखाव मॉडल (बीओओएम) के तहत भाग लेंगे।

सरकार ने कहा कि यह योजना 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। इससे देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और कार्बन उत्सर्जन घटाकर पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

योजना से बिजली क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण उद्योगों में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की भी उम्मीद है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के विनिर्माण और स्थापना से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में रोजगार बढ़ेगा, जबकि संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन में दीर्घकालिक कुशल रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भाषा रमण अजय

अजय


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