मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की ‘गोबरधन’ योजना को दी मंजूरी, बायोगैस उत्पादन बढ़ाने पर जोर

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मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन' योजना को दी मंजूरी, बायोगैस उत्पादन बढ़ाने पर जोर

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 07:08 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 07:08 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में तेजी लाने के लिए बृहस्पतिवार को 23,731 करोड़ रुपये की एक राष्ट्रीय एकीकृत योजना को मंजूरी दी। यह योजना आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को मजबूत करने के लिए कृषि एवं शहरी कचरे के उपयोग पर आधारित है।

सरकार ने एक बयान में कहा कि ‘गोबरधन’ (जैविक संसाधनों से धन सृजन) योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 के बीच लागू की जाएगी। इसका लक्ष्य सुनिश्चित खरीद, विनियमित मूल्य, पूंजी सब्सिडी, पाइपलाइन अवसंरचना और वित्त तक आसान पहुंच के जरिये घरेलू सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है।

कुल 23,731 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के तहत कृषि अवशेष, गोबर, चीनी उद्योग का कचरा (गन्ने की खोई), शहरी जैविक कचरा एवं अन्य बायोमास का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी। इस गैस को वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी में मिलाया जा सकेगा।

यह योजना मौजूदा पहल, जैसे ‘सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन’ (सतत) कार्यक्रम पर आधारित है, जिसके तहत 200 से अधिक सीबीजी संयंत्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

नए ढांचे के तहत शहरी गैस वितरण कंपनियां सीएनजी और घरों को आपूर्ति होने वाली पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) में सीबीजी की अनिवार्य मिलावट के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सीबीजी खरीदेंगी। वित्त वर्ष 2026-27 में तीन प्रतिशत, 2027-28 में चार प्रतिशत और 2028-29 से पांच प्रतिशत मिलावट का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार ने उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को किफायती बनाए रखने के उद्देश्य से सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का विनियमित मूल्य भी तय किया है।

गोबरधन योजना के तहत पात्र नई परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन पर अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता मिलेगी, जबकि पुरानी विस्तार परियोजनाओं को भी समर्थन दिया जाएगा।

इसके साथ, सीबीजी संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइन और शहरी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए अवसंरचना वित्तपोषण, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण गारंटी व्यवस्था और जैविक कच्चे माल के एकत्रीकरण, प्रौद्योगिकी अपनाने और जिला-स्तरीय परियोजनाओं के विकास के लिए एक विशेष कोष का प्रावधान किया गया है।

बयान के मुताबिक, इस कार्यक्रम से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय के नए अवसर पैदा होंगे, कचरा प्रबंधन में सुधार होगा, जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी।

भारत अपनी ऊर्जा बदलाव रणनीति के तहत प्राकृतिक गैस के उपयोग का विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही कम्प्रेस्ड बायोगैस जैसे नवीकरणीय गैसीय ईंधन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयातित एलएनजी पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय